गोंडा। श्रम विभाग की अंत्येष्टि योजना में हेराफेरी कर लाखों हड़पने का भंडाफोड़ हुआ है। पांच साल चली जांच के बाद धोखाधड़ी का यह मामला सामने आया। इसकी शिकायत जिलाध्यक्ष भाजपा अमर किशोर कश्यप ने की थी।
जिस व्यक्ति को मृत बता कर योजना से धनराशि स्वीकृत कराई गई वह जीवित मिला और जालसाज ने स्वीकृत धनराशि अपने खाते में ट्रांसफर करा हड़प ली। इस मामले की जांच रिपोर्ट की संस्तुति के आधार पर जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने आरोपी के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया है।
श्रम विभाग में पहले पंजीकृत श्रमिक के मृत्यु होने पर अंत्येष्टि सहायता के रूप में 2.25 लाख रुपये की मदद राशि दी जाती थी। वर्ष 2016 में इंटियाथोक के केशवराम की पत्नी कृष्णा देवी के मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर योजना का लाभ पाने को आवेदन किया।
जबकि जांच के समय केशवराम की पत्नी कृष्णा देवी जीवित थी। पुत्र संतोष ने बताया कि पिता केशवराम की मृत्यु साल 2015 में हुई थी। मृत्यु की पुष्टि के लिए जिस ग्राम विकास अधिकारी का हस्ताक्षर परिवार रजिस्टर पर है, वह भी कभी उस गांव में नियुक्त ही नहीं था। जांच में सामने आया कि वास्तविक मृतक के परिजनों की तरफ से इस योजना के लिए आवेदन ही नही किया गया था।
बताया गया कि दो लोगों ने योजना का लाभ पाने के लिए छावनी स्थित यूपी बैंक में यह कह कर खाता खुलवाया था कि कुछ रुपये आएंगे, जो आपके नाम से होगा। इसके साथ ही ब्लैंक चेक भी लिया।
जांच टीम की रिपोर्ट के अनुसार जब संतोष के खाते में योजना की राशि गयी तो इनमें से एक व्यक्ति ने उसे अपनी पत्नी के खाते में धनराशि ट्रांसफर कर लिया। इसके बाद शिकायत होने पर फिर वापस भी किया। साल 2017 में इसकी शिकायत हुई लेकिन कार्रवाई नही हुई।
अब जांच में यह बात सामने आई कि दो लोगों ने रविंद्र चौबे और संतोष कुमार के नाम से फर्जीवाड़ा करके सरकारी योजना का लाभ उठाने की आड़ में धनराशि का गबन कर लिया। टीम ने दोनों आरोपियों के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने की संस्तुति की है।