गोंडा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए पंचायतों के आरक्षण पर आपत्तियों के निस्तारण में अधिकारी मंथन करने में जुटे हैं। जिले में 1214 पंचायतों के लिए आरक्षण जारी की गई है और आपत्तियां मंगलवार तक ली गई हैं।
650 पंचायतों के आरक्षण पर लोगों ने सवाल खड़े हो गए हैं। आपत्तियों के सवालों का हल खोजने में अधिकारी जुटे हैं। आरक्षण की आपत्तियों को निस्तारित कर 26 मर्च को फाइनल आरक्षण लिस्ट जारी हो सकती है। इससे पहले गुरुवार को आरक्षण पर आईं आपत्तियों का निस्तारण होगा।
तीन दिनों में गोंडा में 650 लोगों ने पंचायत चुनाव को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। सभी आपत्तियों को बुधवार को डीपीआरओ कार्यालय में एकत्र किया गया है और आपत्तियों में उठाए गए सवालों का परीक्षण किया जा रहा है। जहां पर चार सदस्यीय टीमें उसकी जांच कर निस्तारण करेंगी।
उसके बाद 26 मार्च को आरक्षण का अंतिम प्रकाशन डीएम की ओर से किया जाएगा। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जिले में 21 मार्च को आरक्षण की अनंतिम सूची जारी कर दी गई थी। उसके साथ ही ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी व ग्राम पंचायत सदस्य के लिए ताल ठोंकने वालों ने प्रचार-प्रसार युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है।
डीपीआरओ सभाजीत पांडेय ने बताया कि डीएम की अध्यक्षता में सीडीओ, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत की चार सदस्यीय टीम आपत्तियों का निस्तारण करेगी। जिले में 1214 प्रधान, 65 जिला पंचायत सदस्य, 1614 बीडीसी व 15410 ग्राम पंचायत पद को लेकर आरक्षण की सूची जारी हुई थी। 20 से 23 तक आपत्तियां ली गईं हैं।
24 व 25 को आपत्तियों को जिला पंचायत राज अधिकारी के यहां से निस्तारण के लिए समिति को उपलब्ध कराया जाएगा और निस्तारण होगा। इसके बाद आपत्तियों का परीक्षण करने के बाद निस्तारण होगा और उसके बाद 26 मार्च को अंतिम प्रकाशन कर दिया जाएगा।
पंचायत चुनावों के लिए अनंतिम आरक्षण सूची ने कई दावेदारों का गणित बिगाड़ दिया है। सामान्य सीटों पर एससी का, एससी सीटों पर पिछड़ा वर्ग का आरक्षण हो गया है। वहीं महिलाओं को भी इस बार 33 फीसदी आरक्षण दिया गया है। आरक्षण का क्रम बदलने से कई महीनों से चुनावी मेहनत कर रहे दावेदारों में बेचैनी छायी हुई है और वह अनंतिम सूची पर आपत्तियां दिए हैं।
कईयों ने आबादी के हिसाब से दावा पेश किया है कि उनके पंचायत का आरक्षण गलत हुआ है। प्रसपा के जिलाध्यक्ष सुरेश शुक्ल ने तो जिला पंचायत सदस्य के 65 पदों के आरक्षण पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि ऐसा आरक्षण हुआ कि किसी क्षेत्र में कई सीटें अनारक्षित हो गई हैं तो कई क्षेत्रों में कई सीटें आरक्षित हो गई हैं। इसमें सुधार किया जाना चाहिए।
पंचायतों का आरक्षण तय किए जाने में ब्लॉक स्तर पर हेराफेरी का आरोप लगा है। परसपुर के विश्वनाथ मिश्र ने तो कई स्तर के आबादी की सूची प्रस्तुत कर हेराफेरी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दो गांवों को लाभ देने के लिए कई गांवों के आरक्षण में बदलाव किया है।
जिससे नरदा, परसपुर, तुलसीपुर माझा समेत कई गांवों का आरक्षण बदल गया है। इसी तरह बेलसर के भी कई लोगों ने आपत्तियां दी हैं। रूपईडीह के पचरूखी मनोहरजोत पंचायतों में दो गावों के होने के बाद आबादी में हेराफेरी करके आरक्षण तय किए जाने के आरोप लगे हैं। इस बार पिछली बार से अधिक आपत्तियां आईं हैं, जिसके निस्तारण में अधिकारियों को माथापच्ची करना पड़ रहा है।