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अलाव के सहारे पूस की रात काट रहे बंदी

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गोंडा। मौसम में आए बदलाव से पारा लुढ़कने का असर जिला कारागार के बंदियों पर भी पड़ा है। ठिठुरन से बंदियों को बचाने के लिए जिला कारागार में सिर्फ 2000 कंबल की ही व्यवस्था है। इनमें से 500 कंबल कंडम हालत में हैं। कारागार के 820 बंदी अलाव के सहारे पूस की रात काट रहे हैं। गलन से 11 बुजुर्ग बंदी बीमार हालत में हैं। जिन्हें जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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जिला कारागार में निरुद्ध 820 बंदी इन दिनों ठंड से बेहाल हैं। गलनभरी ठंड का असर यहां के बंदियों पर भी है। जेल में निरुद्ध 11 बुजुर्ग बंदी ठंड से बीमार हैं। इन बंदियों को सर्दी-जुकाम सहित बुखार की शिकायत है। उनका जेल के अस्पताल में इलाज चल रहा है। बंदियों को सर्दी से बचाने के लिए जेल प्रशासन के पास मात्र 2000 कंबल की व्यवस्था है। इसमें से तकरीबन 500 कंबल कंडम हालत में हैं। जेल के बंदियों को ठंड से बचाने के लिए जेल प्रशासन ने अस्पताल, महिला बैरक के अलावा अन्य 13 बैरकों में अलाव की व्यवस्था कराई है। सभी बैरकों में सुबह और शाम अलाव जलवाया जा रहा है। पिछले तीन दिनों से पूरे दिन अलाव जलवाया जा रहा है। मगर कंबल की कमी के चलते बंदियों पर गलनभरी रात भारी पड़ रही है।
जेल के बाहर मुलाकातियों के लिए अलाव की व्यवस्था
जिला कारागार में निरुद्घ बंदियों से मिलने हर रोज पांच से छह सौ मुलाकाती आते हैं। उन्हें ठंड से बचाने के लिए जेल के बाहर कारागार परिसर में अलाव की व्यवस्था कराई गई है। यहां दो पालियों में मुलाकातियों को बंदियों से मिलाया जाता है। पहली पाली में सुबह नौ बजे से 11 बजे तक उसके बाद दूसरी पाली में 12 बजे से दो बजे तक। इस बीच दूसरी पाली के मुलाकाती को अपनी पाली आने का इंतजार करना पड़ता है। लिहाजा यहां अलाव की व्यवस्था कराई गई है।
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बंदियों को कंबल देने का ये है मानक
जेल मैनुअल के मुताबिक प्रत्येक बंदी को तीन कंबल देने का प्रावधान है। इसमें एक कंबल को बंदी बिछावन के काम में लाता है। इसके अलावा दो कंबल ओढ़ने के काम आते हैं। हर तीसरे साल बंदियों के पुराने कंबल को कंडम कर दिया जाता है। इसके बाद बंदियों को नया कंबल दिया जाता है।
तीन साल में कंडम हो जाते हैँ कंबल
बंदियो के लिए कारागार प्रशासन हर तीसरे साल कंबल की आपूर्ति करता है। यहां आपूर्ति किए जाने वाले कंबल की लाइफ तीन साल की होती है। तीन साल में ये कंबल कंडम घोषित कर दिए जाते हैं। इसके बाद जेल प्रशासन मुख्यालय को कंबलों की आपूर्ति के लिए डिमांड भेजता है।
मुख्यालय को भेजी 1000 कंबल की डिमांड
बंदियों को गलनभरी ठंड से बचाने के लिए जेल में चल रही कंबलों की कमी के मद्देनजर जेल प्रशासन ने जेल मुख्यालय को 1000 कंबलों की आपूर्ति के डिमांड भेजी है। जेल प्रशासन ने डिमांड नोट में कहाकि जेल में औसतन साढ़े आठ सौ बंदी निरुद्घ रहते हैं। इनके लिए सिर्फ 2000 कंबल ही है। जिससे बंदियों को गलनभरी ठंड में रात गुजारने में परेशानी हो रही है।
स्वयंसेवी संस्थाओं से कंबल मिलने की उम्मीद
जिला कारागार के 820 बंदियों को गलन भरी ठंड से बचाने के लिए कारागार में कंबलों की कमी को दूर करने के लिए जेल प्रशासन को स्वयंसेवी संस्थाओं से उम्मीद जगी है। बंदियों की पूष की रात अब स्वयंसेवी संस्थाओं से मिलने वाले कंबल के सहारे कटेगी। जेल प्रशासन ने कई स्वंयसेवी संस्थाओं से जेल के बंदियों की मदद के लिए कंबल की देने की मदद मांगी है। एक संस्था ने जेल प्रशासन को कंबल की देने का आश्वासन भी दिया है।
जिला कारागार के 820 बंदियों के लिए यहां सिर्फ 2000 कंबल ही है। जिससे बंदियों को गलनभरी रात गुजारने में दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि बंदियों को ठंड से बचाने के लिए अलाव की व्यवस्था की गई है। मगर सोते समय कंबल की जरुरत पड़ती है। इसलिए जेल मुख्यालय लखनऊ को 1000 कंबलों की आपूर्ति के लिए डिमांड भेजी गई है। स्वयंसेवी संस्थाओं से भी कंबल की मांग की गई है। -शशिकांत सिंह, जेल अधीक्षक गोंडा।
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