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Gonda News: प्रसूताओं को नहीं मिल रहा भोजन, जांच भी मुश्किल

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करनैलगंज सीएचसी में मरीजों को दवाएं लिखतीं चिकित्सक। - संवाद 
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करनैलगंज/तरबगंज। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करनैलगंज में प्रसूताओं को भोजन, फल और दूध नहीं मिल रहा है। मरीजों का कहना है कि नाश्ता और भोजन अस्पताल से नहीं मिल रहा है। भोजन बनाने वाले कक्ष पर ताला पड़ा है।
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अस्पताल में जांच की सुविधा होने के बावजूद मरीजों को बाहर से जांच करानी पड़ती है। बायो केमिस्ट्री जांच मशीन खराब है, जिससे एलएफटी, केएफटी आदि जांचें नहीं हो पा रही हैं। प्रसव के बाद महिलाओं को कुछ दवाएं ही अंदर से दी जाती हैं। इसके अलावा बाहरी दवाओं के पर्चे थमाए जा रहे हैं। अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 450 नए और 150 पुराने मरीज इलाज के लिए आते हैं। चिकित्सकों की कमी है। महिला दलालों का बोलबाला है। ये दलाल मरीजों को बहला फुसलाकर बाहरी जांच कराती हैं और डाॅक्टर से कहकर बाहर की दवाएं भी लिखवाती हैं।

अधीक्षक डॉ. सौम्या श्रीवास्तव ने बताया कि भोजन और नाश्ते की व्यवस्था नहीं है। सभी जांच के लिए संसाधन उपलब्ध हैं। सीएमओ को स्थिति की जानकारी दी गई है। जल्द ही प्रसूताओं के लिए भोजन और नाश्ते की व्यवस्था सुचारु कराई जाएगी।
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तरबगंज सीएचसी में भी नहीं मिल रहा खाना
तरबगंज सीएचसी में भर्ती मरीजों को भी भोजन नहीं मिल रहा है। अप्रैल में पुष्पांजलि स्वीट्स एंड नमकीन गोंडा को टेंडर आवंटित हुआ है, लेकिन भोजन वितरण व्यवस्था पूरी तरह से ठप है। बुधवार की रात अस्पताल में छह महिलाओं का प्रसव कराया गया, जबकि बृहस्पतिवार को एक प्रसूता ने बच्चे को जन्म दिया। छह गर्भवती महिलाओं की जांच कर उन्हें इलाज और सुझाव दिए गए।

स्टाफ नर्स नम्रता ने बताया कि सीएचसी की लैब में सीबीसी, लिपिड प्रोफाइल, एलएफटी, केएफटी, शुगर, मलेरिया, टाइफाइड, डेंगू, टीबी आदि की जांच हो रही है। अल्ट्रासाउंड और थाइराइड जैसी जांच के लिए मरीजों को मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। वर्तमान समय में टाइफाइड जांच की किट उपलब्ध नहीं है। महिला चिकित्सक भी तैनात नहीं है।

अधीक्षक डॉ. नवनीत गौरव सिंह ने बताया कि अस्पताल की जांच मशीनें दुरुस्त हैं और सभी रसायन उपलब्ध हैं। प्रसूताओं और भर्ती मरीजों को भोजन न मिलने की सूचना सीएमओ को पत्र के माध्यम से दी गई है।
सीएचसी की मशीनें खराब, कई जांचें ठप
खरगूपुर। स्थानीय सीएचसी की हेमेटोलोजी, इलेक्ट्रोलाइट और सेमी ऑटोइमोलाइजर की मशीनें लगभग एक साल से खराब होने के कारण मरीजों की सेल काउंट और बायोकेमेस्ट्री की जांचें बंद हैं। इसके लिए मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। छह माह पहले पीओसीटी के इंजीनियर ने मशीन को ठीक किया था, लेकिन कुछ दिन चलने के बाद फिर से खराब हो गई। तभी से जांचें बंद हैं।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. अजय कुमार यादव ने बताया कि जून माह में टेंडर हुआ था। तब से प्रसूताओं को दूध, ब्रेड, फल और अनुमन्य भोजन दिया जा रहा है। बैदौरा बाजार की प्रसूता कलीमुन्निशां ने बताया कि उसे नाश्ता और भोजन समय पर मिल रहा है। अधीक्षक के अनुसार, जांच के रसायन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। इसके अलावा एक्सरे, हीमोग्लोबिन, सुगर, मलेरिया, डेंगू, एचआईवी, एचबीएसएजी, बीडीआरएल और गर्भवती महिलाओं की सभी जांचें नियमित रूप से हो रही हैं। (संवाद)
टेक्नीशियन ही नहीं, कैसे हो जांच


मसकनवा। सीएचसी छपिया में एक्सरे मशीन है, लेकिन टेक्नीशियन नहीं है। इसलिए उसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा। नई डिजिटल एक्सरे मशीन भी आकर रखी है। अभी तक इंस्टाल नहीं की गई है। सीबीसी, एलएफटी, केएफटी, लिपिड प्रोफाइल, मलेरिया, डेंगू और टीबी की जांच की सुविधा है, किंतु थायराइड की जांच नहीं हो रही है।

सीएचसी पर मरीज हरीराम, राजेश कुमार, जगप्रसाद, मुकेश, सावित्री आदि ने बताया कि थायराइड जांच और एक्सरे सुविधा न होने के कारण प्राइवेट पैथोलॉजी और एक्सरे सेंटर जाना पड़ता है। पर्चा अब ऑनलाइन पंजीयन के माध्यम से बन रहा है। यहां पर प्रसूताओं को नाश्ता व भोजन मिल रहा है। अधीक्षक डॉ. अमित कुमार ने बताया कि मरीजों का एक्सरे लैब टेक्नीशियन से कराया जाता है। नई डिजिटल एक्सरे मशीन इंस्टाल करने और टेक्नीशियन की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। थायराइड जांच की सुविधा भी शीघ्र ही उपलब्ध कराई जाएगी। नाश्ते में चाय, ब्रेड और फल तथा भोजन में चावल, दाल, रोटी और सब्जी दिया जा रहा है। (संवाद)
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