गोंडा। ग्राम पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर जहां प्रशासन अपनी कसरत में जुटा है वहीं चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों ने भी अभी से तिकड़मबाजी शुरू कर दी है। इस तिकड़मबाजी में मुजेहना ब्लॉक के राजस्व गांव धुसवा को ग्राम पंचायत का दर्जा दिलाने के लिए कर्मचारियों ने गजब का कारनामा कर डाला है। चुनाव लड़ने वाले एक संभावित प्रत्याशी से मिलीभगत कर कर्मचारियों ने धुसवा गांव की आबादी बढ़ाने के लिए ग्राम पंचायत बेलहरी के राजस्व गांव सिंहपुर की जनसंख्या को धुसवा गांव में शामिल कर दिया है और नए परिसीमन में धुसवा को ग्राम पंचायत बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। सिंहपुर गांव के लोगों ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसकी शिकायत जिला पंचायत राज अधिकारी से की है और धुसवा मे शामिल की गई आबादी को सिंहपुर में वापस कर सिंहपुर को ग्राम पंचायत बनाने की मांग की है।
वर्ष 2001 में कराई गई जनगणना के मुताबिक ग्राम पंचायत बेलहरी के राजस्व गांव सिंहपुर की आबादी 643 थी जो एक दशक बाद वर्ष 2011 की जनगणना में बढ़कर करीब 13 सौ के पार पहुंच गई थी लेकिन वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव के पहले होने वाले परिसीमन में राजस्व गांव धुसवा को ग्राम पंचायत का दर्जा दिलाने के लिए यहां के एक प्रत्याशी ने पंचायत विभाग के कर्मियों से मिलीभगत कर राजस्व गांव सिंहपुर की जनसंख्या को वहां से काटकर धुसवा गांव में जोड़ दिया ताकि धुसवा की जनसंख्या एक हजार के पार हो जाए और नए परिसीमन में उसे ग्राम पंचायत का दर्जा दिलाया जा सके। तत्कालीन ग्राम प्रधान संदीप मिश्रा ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी से करते हुए सिंहपुर गांव की जनसंख्या को धुसवा से काटे जाने की मांग की थी।
हालांकि पिछले पंचायत चुनाव में परिसीमन नहीं हो सका था और ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया अधूरी रह गई थी। तब यह मामला ठंढे बस्ता में चला गया था। अब जब ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन का कार्य फिर से किया जाना है और इसके लिए परिसीमन की प्रक्रिया गतिमान है तो एक बार से इस फर्जीवाड़े ने तूल पकड़ लिया है। सिंहपुर गांव के रहने वाले अनंतराम पांडेय व राकेश कुमार ने जिला पंचायत राज अधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में धुसवा गांव में शामिल की गई सिंहपुर गांव की जनसंख्या को वहां से काटकर फिर से सिंहपुर मे शामिल करने और नए परिसीमन मे धुसवा की जगह सिंहपुर को ग्राम पंचायत बनाने की मांग की है।
धुसवा की जगह सिंहपुर गांव बन सकता है नई ग्राम पंचायत
ग्रामीणों की शिकायत के मुताबिक अगर राजस्व गांव सिंहपुर की जनगणना और मतदाता सूची पर गौर किया जाए तो मामला बेहद चौंकाने वाला है। वर्ष 2011 की जनगणना में गांव की कुल आबादी 389 दर्शायी गई है जबकि यही आबादी वर्ष 2001 की जनगणना में 643 थी। इस एक दशक में गांव की आबादी बढ़ने के बजाय बेहद कम हो गई यह बड़ा सवाल है। वहीं यदि वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में सिंहपुर गांव मे मतदाताओं की संख्या पर नजर डालें तो इस समय यहां पर कुल 630 मतदाता थे जो इस बार के पुनरीक्षण के बाद करीब सात सौ के पार पहुंच जायेंगे। वहीं अगर आबादी की बात की जाए तो यहां की आबादी 12 सौ के ऊपर है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां की जनसंख्या को धुसवा गांव में शामिल कर अब गांव की आबादी 389 दिखाई जा रही है। अब सवाल यह है कि जब यहां की जनसंख्या ही 389 है तो यहां पर सात सौ के ऊपर मतदाता कैसे हो सकते हैं। फिलहाल परिसीमन में आपत्ति के बाद अब इसकी जांच तो तय मानी जा रही है। अगर सही तरीके से जांच की गई तो राजस्व गांव धुसवा की जगह पर राजस्व गांव सिंहपुर नई ग्राम पंचायत बनाई जा सकती है।
राजस्व गांव सिंहपुर की जनसंख्या को धुसवा गांव में जोड़े जाने की शिकायत मिली है। इस संबंध में ग्रामीणों ने साक्ष्य भी उपलब्ध कराया गया है। सभी का परीक्षण कराया जाएगा। यदि इस तरह हुआ है तो सिंहपुर गांव की जनसंख्या को वापस उसी गांव में जोड़ा जाएगा। -सभाजीत पांडेय, जिला पंचायत राज अधिकारी