थोड़ी सी बरसात क्या हुई, पूरा शहर जलभराव की गिरफ्त में जकड़ गया। जी हां यह हाल है कहीं और का नहीं बल्कि उस गोंडा नगर पालिका की बदइंतजामी का है, जिसने करोड़ों रुपये खर्च करके नाले तो बनवा लिए, लेकिन इन नालों का पानी कहां जाएगा, अभी तक यह तय नहीं हो सका है। जिससे करोड़ों रुपए खर्च कर बनवाए गए नाले चोक चल रहे हैं और बरसात का सारा पानी सड़क के साथ लोगों के घरों में घुस रहा है।
लेकिन इसकी फिक्र न तो नगर पालिका को है न ही नगर पालिका के कार्यों की मानीटरिंग कर रहे जिला प्रशासन को। जिसका खामियाजा आगे होने वाली बरसात में लोगों को तबतक उठाना पड़ेगा, जबतक कि नालों से होने वाली जलनिकासी की समस्या हल नहीं हो जाती।
साढ़े तीन लाख की आबादी वाले गोंडा शहर में भले ही कोई सीवर लाइन न हो, लेकिन यहां नालों व नालियों की कोई कमी नहीं है। 30 से ज्यादा नाले और सैकड़ों की संख्या में नालियां पूरे शहर में बनी हुई हैं। बावजूद इसके शहरी लोगों को जलभराव की समस्या से कोई निजात नहीं मिल पा रही। बुधवार को हल्की सी बरसात क्या हुई, गोंडा-लखनऊ रोड से लेकर बहराइच, उतरौला, बलरामपुर जाने वाली सड़कें जलभराव की आगोश में डूब गईं।
जिला अस्पताल हो या फिर जीजीआईसी स्कूल, हर जगह का नजारा अपने आप में देखने लायक था। जहां सड़क के दोनों किनारों पर बने नाले पूरी तरह से पटे पड़े थे और उसका गंदा पानी सड़क पर घुटनों तक की ऊंचाई पर बह रहा था।
यही नहीं गोंडा नगर पालिका के सभी 27 वार्डों की स्थिति भी इस बरसात के बाद देखने लायक हो गई है। जहां कोई भी मोहल्ला ऐसा नहीं है, जहां जलभराव न हो। जबकि इसी जलभराव से निजात दिलाने के लिए नगर पालिकी की ओर से करोड़ों रुपए खर्च कर कई नाले और नालियां तक बनवाई गई।
लेकिन इन नालों और नालियों की सफाई न होने और इससे निकलने वाले गंदे पानी की निकासी का स्थान तय न होने के कारण अब यही नाले लोगों के लिए बवाले जान बन गए हैं।
वहीं शहर में कुछ जगहें तो ऐसी भी हैं, जहां नाला और सड़क जलभराव के कारण दिखाई ही नहीं दे रहे। बावजूद इसके नगर पालिका के प्रशासक व एडीएम त्रिलोकी सिंह का दावा है कि नगर पालिका की सफाई गैंग लगातार जलनिकासी की व्यवस्था में जुटी हुई है।