- पुलिस ने एफआईआर लिखने के बजाए पीड़ित परिवार को टरकाया
संवाद न्यूज एजेंसी
गोंडा। एससीपीएम हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई। मरीज के घरवाले अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए विरोध करने लगे। जिसके बाद बाउंसरों व अस्पताल स्टाफ ने उनके साथ मारपीट की, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुलिस ने भी एफआईआर लिखने के बजाए पीड़ित परिवार को टरका दिया। एएसपी ने जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कही है।
करनैलगंज के दूंदा निवासी लालजी दुबे ने बताया कि उनके बड़े भाई ओमप्रकाश दुबे को बुधवार की देर रात एससीपीएम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। ओमप्रकाश को वेंटीलेटर पर रखकर इलाज शुरू किया, लेकिन कोई वरिष्ठ चिकित्सक उन्हें देखने नहीं आया। ट्रेनिंग करने वाले छात्रों के सहारे इलाज चलता रहा और 24 घंटे में करीब 50 हजार रुपये का बिल बना दिया गया। बृहस्पतिवार शाम एक चिकित्सक आए और उन्होंने गंभीर स्थित बताते हुए उनके भाई को लखनऊ रेफर कर दिया। अस्पताल से बाहर निकले पर पता चला कि भाई की मौत हो चुकी है। आशंका होने पर उनकी मां हॉस्पिटल के संचालक डॉ. ओएन पांडेय ने बात करने पहुंची, लेकिन डॉक्टर के चेंबर के बाहर खड़े बाउंसरों ने उन्हें रोक लिया। विरोध करने पर बाउंसरों और अस्पताल के स्टाफ ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। अन्य तीमारदारों के आने पर उनको भी मारापीटा गया। वायरल वीडियो में काले कपड़ों में बाउंसर व हॉस्पिटल का आई-कार्ड लटकाए कुछ लोग महिलाओं पर थप्पड़ बरसाते नजर आ रहे हैं। पुलिस के पहुंचने पर मामला शांत हुआ।
लालजी दुबे का आरोप है कि मरीज की मौत होने के बाद भी उनके भाई को भर्ती रखा गया और इलाज चलने की बात कही गई। नगर कोतवाली पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज करने के बजाए पीड़ित को टरका दिया। कोतवाल राजेश सिंह ने कहा कि पहले जाकर अपने भाई का अंतिम संस्कार करो, फिर आकर तहरीर देना। वीडियो वायरल होने के बाद एएसपी मनोज कुमार रावत ने कहा कि सूचना मिलने पर प्रभारी निरीक्षक व सीओ सिटी ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराया। तहरीर मिलने पर जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
गंभीर हालत में आया था मरीज
गंभीर हालत में मरीज को वेंटीलेटर पर लिया गया। परिजनों को लखनऊ ले जाने के लिए कहा गया, लेकिन वह नहीं माने। इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई। जिस पर एक महिला ने मेरे चेंबर के बाहर गाली देना शुरू कर दिया। कोई मारपीट नहीं हुई है। तीमारदारों के आरोप निराधार हैं।
- डॉ. ओएन पांडेय, हॉस्पिटल संचालक