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481 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को चार साल बाद पहचान

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फोटो-15-गोंडा के कंपोजिट विद्यालय कपूरपुर में मौजूद छात्राएं। फाइल फोटो - फोटो : GONDA
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गोंडा। बेसिक स्कूल शासन के नए प्रयोगों का अखाड़ा बन गया है। जिले के 481 स्कूलों के प्रधानाध्यापक चार सालों से अपनी पहचान का इंतजार करते रहे। स्कूल के मुखिया होने के दौरान साल 2018 में विभाग के एक आदेश ने उनकी पहचान छीन ली। जूनियर हाईस्कूल के परिसर में संचालित इन प्राइमरी स्कूलों का साल 2018 में संविलियन करके कंपोजिट स्कूल कर दिया गया, लेकिन तय नहीं किया गया कि स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को क्या लिखा जाए। यह विवाद अभी भी स्कूलों में बना हुआ है। अब जाकर शासन ने कंपोजिट स्कूल में शामिल किए गए प्राइमरी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सहायक अध्यापक उच्च प्राथमिक विद्यालय पद नाम दिया है। अब जाकर बेसिक शिक्षा परिषद ने स्थिति स्पष्ट की है।
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विभाग ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, छात्र संख्या एवं स्कूल के प्रकार का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। 25 अप्रैल तक यह रिपोर्ट अपलोड करने हैं। शिक्षकों की सेवा पुस्तिका व नवनियुक्त शिक्षकों का विवरण स्कूल का यू- डाइस कोड अपलोड करना है। इसी आदेश में संविलित विद्यालयों में प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को सहायक अध्यापक उच्च प्राथमिक स्कूल अंकित करके अपडेट किया जाना है। जिले स्तर पर एक नोडल अधिकारी भी नामित किया जाना है, जिसका नाम, मोबाइल नंबर तथा एमआईएस इंचार्ज का नाम और मोबाइल नंबर विभाग ने मांगा है।
इस आदेश से अब यह स्पष्ट हो सका है कि कंपोजिट स्कूलों के प्राइमरी स्कूलों के प्रधानाध्यापक को क्या माना जाए। कंपोजिट सिस्टम लागू होने से 481 प्राइमरी स्कूलों का अस्तित्व तो खत्म ही हो गया था, उनके प्रधानाध्यापक भी अपनी पहचान के लिए भटक रहे थे। कंपोजिट स्कूल के प्रधानाध्यापक अफसर हसन कहते हैं कि कंपोजिट स्कूल तय किए जाने के समय ही विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी। लेकिन कई बार मांग के बाद भी विभाग ने प्राइमरी के प्रधानाध्यापकों के बारे में कोई आदेश नहीं दिया। जिससे दिक्कत आ रही थी। जबकि कई स्कूलों में विवाद की स्थिति थी। कंपोजिट होने के बाद भी प्राइमरी के प्रधानाध्यापक अपना अलग रजिस्टर रख रहीं थीं और खाता भी बदलवाने में आनाकानी कर रहे थे। इससे कई स्कूलों में विवाद जैसी स्थिति थी। चार साल के इंतजार के बाद अब इन शिक्षकों को राहत मिली है। यह अलग बात है कि इस पदनाम से वह शिक्षक संतुष्ट नहीं हैं। (संवाद)
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संविलियन करने से घट गए शिक्षकों के पद
शासन के एक ही परिसर में संचालित सभी परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के संविलियन करने के फरमान से शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं को झटका लगा है। शिक्षकों के पद कम होने के साथ-साथ इंचार्ज शिक्षकों पर काम का बोझ भी बढ़ा है। शिक्षकों पर काम का बोझ बढ़ाने के साथ उनके वेतनमान में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। जिले में 481 प्राइमरी स्कूलों को कंपोजिट स्कूल में शामिल करने से वहां पर एक- एक प्रधानाध्यापक के पद तो कम हुए ही, कंपोजिट स्कूलों के छात्र संख्या के आधार पर शिक्षक पदों की गणना होने से सहायक अध्यापक के पदों में भी कटौती हुई है।
कंपोजिट से काम का बोझ बढ़ा, वेतनमान जस का तस
स्कूलों के संविलियन पर कक्षा एक से आठ तक संचालित ऐसे विद्यालय में इस परिसर में स्थित सभी विद्यालयों में कार्यरत प्रभारी प्रधानाध्यापकों, प्रधानाध्यापकों में से वरिष्ठतम ही प्रधानाध्यापक के दायित्व देने का निर्णय हुआ था। जिसमें जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक को ही ज्यादातर स्कूलों में प्रधानाध्यापक का प्रभार मिला। विद्यालय का वित्तीय और प्रशासनिक नियंत्रण प्रधानाध्यापक में निहित हो गया। इस प्रकार जहां उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक कार्यरत नहीं हैं। वहां उच्च प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक जो भी वरिष्ठ थे, उन्हें कक्षा एक से आठ तक संविलियन विद्यालय का संपूर्ण चार्ज लेकर प्रधानाध्यापक के दायित्व मिला। जबकि उन्हें उच्च प्राथमिक प्रधानाध्यापक पद का वेतनमान देय नहीं है। ऐसे शिक्षक कक्षा एक से आठ तक के विद्यालय का संपूर्ण चार्ज लेकर कार्य तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें उच्च प्राथमिक प्रधानाध्यापक पद के वेतनमान का आर्थिक लाभ पदोन्नति न होने के कारण नहीं मिल सका।
मानव संपदा अपडेट करने के लिए सचिव से मिले आदेश में कंपोजिट स्कूल में शामिल प्राइमरी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के बारे में निर्देश मिले हैं। कार्रवाई की जा रही है। डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह, बीएसए
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