गोंडा। पंचायतों में कामकाज देखने के लिए पंचायत सहायकों की नियुक्ति एक साल के लिए होगी। प्रधान व सचिव कार्य पर संतोष जताएंगे तो भी दो साल के लिए ही सेवाओं को बढ़ा सकेंगे। पंचायत सहायक के लिए तय शर्तों से युवाओं को मायूसी ही हाथ लगी है। एक साथ तीन कार्य सौंपे जाने के साथ ही मानदेय सिर्फ छह हजार तय किया गया है। जबकि पांच साल पहले पंचायत सहायक के लिए मानदेय दस हजार तय किए जाने की चर्चा थी। यही नहीं कंप्यूटर आपरेटर की नियुक्ति अलग होनी थी। लंबे इंतजार के बाद नियुक्ति आई तो मानदेय भी कम है और तीन कार्य एक साथ सौंप दिए गए हैं। डीपीआरओ सभाजीत पांडे कहते हैं कि पंचायत सहायकों के चयन की प्रक्रिया शासन के निर्देशों के तहत की जा रही है।
जिले के 1214 पंचायतों में पंचायत सहायकों के चयन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी पूरी हो गई है। आवेदन का प्रारूप भी विभाग की ओर से जारी कर दिया गया है और पंचायतों के साथ ही ब्लाक व डीपीआरओ कार्यालय में आवेदन जमा कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। पंचायत सहायक की नियुक्ति की प्रक्रिया तो शुरू हो गई है लेकिन युवाओं को इससे आगे के भविष्य की चिंता सता रही है। एक तो नियुक्ति एक साल की संविदा पर होगी और दो साल के लिए ही विस्तार होगा। ऐसे में अभी मेरिट में आने से नियुक्ति हो भी जाए तो पढ़ाई प्रभावित होनी ही है। इसके आगे वह क्या करेंगे, इसका कोई रास्ता नहीं दिख रहा है।
हाईस्कूल और इंटर के अंकों पर मेरिट तय करके चयन की कार्रवाई प्रधान की अध्यक्षता में गठित प्रशासनिक कमेटी करेगी और जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी अनुमोदन करेगी। भर्ती की प्रक्रिया शिक्षामित्रों और रोजगार सेवकों की तरह ही है। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि पंचायत सहायक को कंप्यूटर ऑपरेटर और लेखाकार का कार्य करना होगा। सचिवालय में उपलब्ध भी रहना होगा और मानदेय छह हजार ही मिलेगा। इससे कई युवाओं के बीच सवाल उठ रहे हैं कि काम के आधार पर मानदेय तय होना चाहिए और पंचायतों के अस्तित्व में रहने तक सेवा की गारंटी मिलनी चाहिए।
मनरेगा के श्रमिकों से भी कम तय मानदेय
पंचायत सहायकों को कार्य तो पूरे करने हैं और पूरे पंचायत का हिसाब किताब बेहतर ढंग से करना होगा। ऑनलाइन कार्य कंप्यूटर पर करने होंगे। मानदेय मनरेगा के श्रमिकों से भी कम है। मनरेगा के श्रमिकों को प्रतिदिन मजदूरी 204 रुपये दिए जाते हैं, जबकि पंचायत सहायकों के लिए तय मानदेय छह हजार रुपये है। दो सौ रुपये प्रतिदिन मानेदय होता है। यही नहीं मनरेगा के श्रमिकों को हर साल कार्य मिलता है और पंचायत सहायकों की नियुक्ति एक साल के लिए ही की जा रही है। विस्तार भी दो साल के लिए हो रहा है। इससे भी लोगों में संशय दिख रहा है।
प्रेरक, रोजगार सेवक व शिक्षामित्रों के हाल से सहमे
पंचायत सहायकों के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू होने से आवेदन तो खूब होंगे। युवाओं में पंचायत से नियुक्त कर्मियों का दर्द याद आ रहा है। शिक्षामित्रों का चयन भी पंचायतों की शिक्षा समिति से हुए थे और 1999 से प्रक्रिया शुरू हुई थी।
20 साल से अधिक समय कार्य करते हो गया लेकिन मानदेय दस हजार से अधिक नहीं बढ़ सका है। समायोजन भी रद्द हो चुका है, इससे आने वाले दिनों में पंचायतों से नियुक्त संविदा कर्मियों के समायोजन की सोचना ही उचित नहीं है। चार साल कार्य करने के बाद दो हजार से अधिक साक्षरता के प्रेरक बेरोजगार घूम रहे हैं। उन्हें तो बकाया मानदेय भी नहीं मिला। इसी तरह रोजगार सेवकों को भी मानव दिवस के सृजन पर मानदेय दिए जाने की व्यवस्था से एक-एक साल तक कभी-कभी मानदेय ही नहीं मिलता है। उनका भी समायोजन नही हो सका है। युवा जय प्रकाश कहते हैं कि ऐसे ही पंचायत सहायकों के लिए आगे तरक्की का कोई अवसर तय नहीं किए गए हैं।