घाघरा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। घाघरा के बढ़े जलस्तर से एल्गिन-चरसड़ी बांध में कटान शुरू हो गई है। सोमवार को बनबसा बैराज से करीब दो लाख क्यूसेक पानी पुन: छोड़ दिया गया है, जो सुबह तक यहां पहुंच जाएगा। इससे घाघरा का जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। इससे कछार पर बसे गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। कटान के चलते नैपुरा व परसावल गांव की करीब ढाई सौ बीघा जमीन घाघरा में समा गई है।
घाघरा की बाढ़ ग्राम परसावल एवं नैपुुरा में कहर बरपा रही है। इन गांवों के किनारे की भूमि धीरे-धीरे धारा में समाहित होती जा रही है। परसावल में ही सुभाष के घर के पास बनी एक पुलिया बाढ़ के पानी में बह गई। करीब 250 बीघा कृषि योग्य भूमि घाघरा की कटान में समा गई। वहीं बांध को मजबूत बनाने के लिए तेजी से कार्य चल रहा है।
सोमवार को घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 से काफी ऊपर हो गया। शाम तक जलस्तर 106.466 सेमी हो गया था। वहीं करीब 2 लाख 85 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज रहा। 247 मीटर लंबे कटवन पर घाघरा की धारा सीधे ठोकर दे रही है। पर घाघरा की तेज धारा इस वर्ष इसे काटने में नाकाम रही है।
हालांकि 11 जुलाई को अप व डाउन में हुई बैक रोलिंग के चलते आसपास कुछ जमीन कटी थी, जिसे पैकप करने का काम पूरा कर लिया गया है। जेई ओमकार का कहना है कि ज्यों-ज्यों जलस्तर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कट व स्परों के नोज को और ऊपर उठाया जा रहा है। जिससे बांध से टकराने वाला पानी बहुत ही कम दाब के साथ बांध से टकराता है।
ऐसे में मशीना का कोई खतरा बाध के डेंजर जोन में नहीं है। बांध पूरा सुरक्षित है। बनबसा बैराज से सोमवार को 2 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है जो मंगलवार की शाम तक एल्गिन बांध पर पहुंचेगा। एई अशोक कुमार ने बताया कि घाघरा का जलस्तर अभी और बढ़ने की संभावना है।
बैराजों से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। रविवार की रात से ही बांध पर कैंप कर रहे एसडीएम करनैलगंज अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि चंदापुर किटौली के तीन मजरे जो नदी व बांध के बीच में बसे है, जिनमें धुसवा, नाऊपुरवा, बिचला पुरवा शामिल हैं।
यहां के लोगों को आने-जाने के लिए तीन नावें उपलब्ध करा दी गई हैं। सोमवार की सुबह तहसीलदार करनैलगंज महेंद्र किसोर मिश्र बांध पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। लोगों से अपील की कि अफवाह पर ध्यान न दें। बांध पूरी तरह सुरक्षित है।