गोंडा। बहुचर्चित एनआरएचएम (अब एनएचएम) घोटाले का जिन्न 11 साल बाद एक बार फिर बाहर आ गया है। बुधवार को सीएमओ कार्यालय में तत्कालीन घटनाओं की चर्चा होती रही। कुछ वरिष्ठ लिपिक घोटाले व पहली बार सीबीआई टीम की दस्तक की चर्चा करते दिखे। मंगलवार को गाजियाबाद में सीबीआई के विशेष न्यायालय में सुनवाई के दौरान गोंडा के सीएमओ कार्यालय के तत्कालीन लिपिक विपिन कुमार का बयान दर्ज किया गया।
तत्कालीन सीएमओ डॉ. एमएम खान पर आरोप है कि उन्होंने दवा विक्रेता संजय कुमार को अनुचित लाभ देने के लिए एनआरएचएम से करीब 17 लाख रुपये से अल्बेंडाजॉल व अन्य दवाओं की खरीद कर डाली। शिकायत होने पर वर्ष 2013 में मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई। 23 अक्तूबर 2013 को एनआरएचएम घोटाले की जांच करने के लिए सीबीआई टीम की दस्तक हुई थी। इस दौरान पूर्व सीएमओ डॉ. एमएम खान व तत्कालीन प्रभारी सीएमओ डॉ. एके श्रीवास्तव से कई घंंटे तक पूछताछ की गई थी।
प्राथमिक जांच में कई तथ्य सामने आए थे। उसी समय एक राजनेता व तत्कालीन लोकसभा प्रत्याशी का नाम भी घोटाले में पहली बार चर्चा में आया था। अब करीब 11 साल बाद एक बार फिर एनआरएचएम घोटाले की चर्चा तेज हो गई है।
सीएमओ डाॅ. रश्मि वर्मा ने बताया कि गाजियाबाद में सीबीआई के विशेष न्यायालय में बयान दर्ज कराने वाले लिपिक विपिन कुमार की जिले में स्वास्थ्य विभाग के किसी कार्यालय या सीएचसी में तैनाती नहीं है। यदि जांच टीम की ओर से कोई जानकारी या अभिलेख मांगा जाएगा तो तत्काल उपलब्ध कराया जाएगा।
चिकित्सा उपकरण खरीद की भी तेज हुई जांच
वित्तीय वर्ष 2017 से 2019 तक स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सा व अन्य उपकरणों की खरीद-फरोख्त में घोटाले के आरोपों की जांच भी तेज हो गई है। एक लिपिक की मानें तो मामले की जांच कर रही सतर्कता अधिष्ठान अयोध्या की टीम ने खरीद संबंधी कई अभिलेख तलब किए हैं। इससे पहले चिकित्सा प्रतिपूर्ति, टीकाकरण कार्यक्रम, छपाई व मेडिकल उपकरण का विवरण भी मांगा जा चुका है। एक पूर्व विधायक की चार फर्मों को काली सूची में डालने के बाद अन्य संदिग्ध फर्मों की जांच तेज हो गई है।