गोंडा। डिग्री कालेजों में अब स्नातक की पढ़ाई आसान नहीं होगी। छात्रों को एक और विषय लेना होगा। श्री लालबहादुर शास्त्री डिग्री कालेज में स्नातक के प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाले छात्रों को पर्यावरण अध्ययन के साथ इस बार पांच विषय लेने पड़े हैं।
इससे पूर्व तीन ही विषय स्नातक में छात्र लेते थे। हाल ही में बीए, बीकाम व बीएससी में करीब तीन हजार छात्रों ने प्रवेश लिये हैं और उन्हें चार विषय चुनना पड़ा। बताया जा रहा है कि नई शिक्षा नीति 2020 को डिग्री कालेज में लागू करने की दिशा में कदम आगे बढ़े हैं। अब पर्यावरण अध्ययन के अनिवार्य विषय को लेकर पांच विषयों की पढ़ाई छात्रों को करनी होगा।
कोविड काल के बाद कॉलेजों की पढ़ाई आगे बढ़ाने में महाविद्यालय प्रशासन जुट गया है। स्नातक स्तर में प्रवेश के लिए छात्रों को चार विषय चुनने का अवसर दिया। प्रवेश के प्रभारी डॉ. बीपी सिंह ने कहा कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की गई है, और डा. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के मानक के अनुसार स्नातक व परास्नातक में प्रवेश दिये गये हैं।
नई शिक्षा नीति से शैक्षिक सत्र में बदलाव किये गये हैं। हिंदी के विभागाध्यक्ष डा. शैलेंद्र नाथ मिश्र ने बताया कि अब छात्रों का शैक्षिक विकास समग्र रूप से होगा। स्नातक से ही छात्रों को व्यवसायिक शिक्षा दी जाएगी। बताया कि डिग्री कालेज में स्नातक स्तर पर 16 विषयों की पढ़ाई होती है।
चार विषय छात्रों को चुनने हैं, और पर्यावरण अध्ययन अनिवार्य है। मुख्य नियंता डॉ. जितेंद्र सिंह कहते हैं कि कोविड काल में वेबिनार के जरिये नई शिक्षा नीति के बारे में व्यापक रूप से लोगों को जानकारी दी गई थी। साथ ही कालेज में प्रवेश लेने वाले छात्रों को चार विषयों के चुनने का मौका मिला है। वह आगे चलकर अपने शैक्षिक कॅरियर का विस्तार कर सकेंगे। इस तरह कॉलेज में नई शिक्षा नीति का प्रभाव देखने का मिल रहा है।
डिग्री कालेज में विषयों की पढ़ाई के साथ ही कौशल विकास पर जोर रहेगा। हर सेमेस्टर में छात्रों को रोजगार परक प्रशिक्षण देने की कार्ययोजना तैयार किया गया है। छात्रों को रोजगार के अवसर भी हासिल हो सकेंगे।
यही नहीं प्रथम वर्ष से व्यवसायिक शिक्षा भी मिलेगी। इसका विस्तार हर साल किया जाता रहेगा। कॉलेज ने शिक्षा देने की ऐसी पहल की है कि छात्र किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सके। नई पहल से कालेज का शैक्षिक वातावरण भी परिवर्तित होगा।
पहली बार कालेज में बीएससी कृषि की पढ़ाई भी शुरू हुई है। कालेज की उपाध्यक्ष वर्षा सिंह की अहम रूचि थी। कृषि में स्नातक करने के लिए छात्रों को अभी तक नवाबगंज में निजी डिग्री कालेज नंदिनीनगर महाविद्यालय जाना पड़ता था।
मुख्यालय के डिग्री कालेज में शिक्षा की व्यवस्था इस बार हुई है। कालेज में कई नए प्रयोग हो रहे हैं जिससे शैक्षिक वातावरण को और बेहतर किया जा सके। विज्ञान शिक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में भी पहल हो रही है।