गोंडा। बेसिक स्कूलों के शिक्षकों के अंतर जनपदीय तबादलों की सूची एक साल बाद जारी तो हुई, लेकिन कहीं खुशी कहीं गम जैसी स्थिति रही। एक हजार से अधिक शिक्षकों को पात्रता सूची में रहते हुए तबादले की सौगात नहीं मिल सकी है। करीब 1100 शिक्षकों का ही जिले से तबादला होने की सूचना मिली है।
बताया जा रहा है कि बीते साल 26 दिसंबर तक की गई कार्रवाई में नए नियमों के कारण 980 शिक्षकों का आवेदन एक साल की उम्मीद के बाद निरस्त हो गया है और जब सूची जारी करनी हुई तो 15 फीसदी तबादले के फैसले से एक हजार के करीब शिक्षकों के मन की मुराद पूरी नहीं हो पाई। तबादले के लिए 2143 शिक्षकों के आवेदन 28 दिसंबर 2020 तक स्वीकृत किए गए थे।
वर्ष 2019 में अंतर जनपदीय तबादले के आवेदन लिए गए थे और यह तय था कि मार्च 2020 में आवेदन करने वाले शिक्षकों को तबादले की सौगात मिल जाएगी। लेकिन उस समय कई तरह के शर्तों और विवादों के कारण तबादले की कार्रवाई नहीं हो पाई।
पहले चरण में जिले से करीब 3000 शिक्षकों ने आवेदन किए थे, लेकिन उनके बीते दिनों उच्च न्यायालय के आदेश पर शिक्षकों की सेवा अवधि में परिवर्तन किया गया तो 980 शिक्षक बाहर हो गए और 2143 के अंतर जनपदीय तबादले की स्वीकृति बीएसए के स्तर से हो गई।
शासन स्तर से मिल रही सूचनाओं से शिक्षकों को उम्मीद थी कि सभी के तबादले हो जाएंगे। तबादला सूची 30 दिसबंर 2020 को जारी होनी थी, लेकिन ऐन वक्त पर फिर तबादले के नियम में परिर्वतन कर दिया गया और जिलों में रिक्त पदों के सापेक्ष15 फीसदी ही तबादले का निर्णय लेकर 31 दिसंबर की देर रात को सूची जारी कर दी गई है।
इससे एक हजार से अधिक शिक्षकों को मायूसी हाथ लगी। पात्र होते हुए भी विकल्प के जिलों में रिक्त पद न होने कारण दिखाते हुए आवेदन निरस्त कर दिए गए। माना जा रहा है कि 1100 के करीब शिक्षकों को तबादले की सौगात तो मिली है लेकिन बहुत से शिक्षकों को मनमाफिक जिला नहीं मिल सका है। कई ऐसे हैं जो तबादले का अवसर छोड़ने की तैयारी में हैं।
बेसिक शिक्षा परिषद परिषद ने कोर्ट के निर्देश पर जिलों में पुरुष शिक्षकों की पांच साल व महिला शिक्षिकाओं की दो साल की सेवा अवधि तय की। इस आधार पर 980 शिक्षकों के आवेदन निरस्त हुए हैं।
पहले पुरुष शिक्षकों की तीन साल व महिला शिक्षिकाओं की एक साल व दिव्यांग को सेवा अवधि से मुक्त रखा गया था। तबादले की नियमावली में उल्लेख था कि जिले में स्वीकृत पदों के सापेक्ष सिर्फ 15 फीसद ही तबादले हो सकेंगे।
इस वजह से उन जिलों के आवेदन निरस्त हुए जहां शिक्षक पहले से अधिक थे और वहां जाने वालों की तादाद ज्यादा थी। कोर्ट के आदेश पर उन महिला शिक्षिकाओं से 18 से 21 दिसंबर तक आवेदन मांगे गए, जो विवाह के बाद दोबारा अंतर जिला तबादला चाहती थी। इस दौरान भी नए आवेदन हुए और उन्हें तबादले का अवसर मिल गया।
अंतर जनपदीय तबादले में देवीपाटन मंडल के सिर्फ गोंडा जिले के ही शिक्षकों को तबादले की सौगात मिली है। इसके अलावा तीनों जिले श्रावस्ती, बलरामपुर व बहराइच जिलों के शिक्षकों को तबादले की सूची से बाहर कर दिया गया है, जबकि इन जिलों से भी छह हजार के करीब शिक्षकों ने आवेदन कर रखा था।
सहायक शिक्षा निदेशक विनय मोहन वन का कहना है कि पहले आवेदन ले लिए गए थे, लेकिन पिछड़ों जिलों से तबादले नहीं हुए हैं। यहां से सिर्फ पारस्परिक तबादले होने हैं। पारस्परिक तबादलों की सूची अभी जारी होनी है।