गोंडा के महिला अस्पताल के एसएनसीयू में नवजात का खून बदलते चिकित्सक।
गोंडा। बड़े अस्पतालों में होने वाली डबल वॉल्यूम एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन (शरीर से खून बदलना) की प्रक्रिया का बृहस्पतिवार को जिला महिला अस्पताल में पहली बार सफल परीक्षण किया गया। करीब दो घंटे तक चली इस प्रक्रिया के दौरान आरएच फैक्टर से पीड़ित नवजात का पूरा खून बदलकर नया कर दिया गया।
बेलसर के पंडितपुरवा निवासी संगीता का प्रसव जिला महिला अस्पताल में हुआ था। उसका ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव व बच्चे का ब्लड ग्रुप बी निगेटिव था। जिससे नवजात में पीलिया का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा था। नवजात के खून में पीलिया 37एमजी/डीएल से अधिक हो गया था। परिजनों ने लखनऊ के बड़े अस्पताल में उपचार कराने में अस्मर्थता जताई तो बृहस्पतिवार को महिला अस्पताल के एसएनसीयू में नवजात को भर्ती कर डबल वॉल्यूम एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन का प्रयास किया गया।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रामलखन ने बताया कि फोटोथेरेपी विधि से खून का सफल एक्सचेंज किया गया। डॉक्टर ने बताया कि मां का ब्लड ग्रुप पॉजिटिव व बच्चे का निगेटिव होने से गर्भ में ही शिशु के खून में संक्रमण शुरू हो जाता है। जन्म के पांच दिन बाद शिशु का दिमाग काम करना बंद कर देता है, और शिशु की मृत्यु हो सकती है। खून बदलने के बाद नवजात बिल्कुल स्वस्थ है। नवजात के पिता बब्लू ने डॉक्टरों के टीम का आभार जताया। इस प्रक्रिया में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पुरुषार्थ शुक्ल, डॉ. परवेज इकबाल, अखिलेश गोस्वामी आदि ने सहयोग किया।