गोंडा। ग्राम पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे निवर्तमान ग्राम प्रधान डीएम की अनुमति के बाद ही अपनी पंचायतों में कोई नया विकास कार्य शुरू करा सकेंगे। नए कार्यों के लिए प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी के अनुमोदन के लिए भेजना अनिवार्य होगा। इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी लालजी दूबे ने सभी खंड विकास अधिकारियों एवं सहायक विकास अधिकारियों (पंचायत) को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें साफ किया गया है कि पुराने व निर्माणाधीन कार्यों से जुड़े कार्यों का भुगतान भी अब जांच के बाद ही हो सकेगा।
शासन और जिलाधिकारी के निर्देश पर 27 मई से निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में केवल सामान्य और नियमित कार्यों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस दौरान उन्हें किसी भी प्रकार का नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार नहीं होगा। निर्देशों के अनुसार प्रशासक की नियुक्ति से पहले स्वीकृत, निर्माणाधीन अथवा पूर्ण हो चुके कार्यों का भौतिक एवं तकनीकी सत्यापन कराकर भुगतान कराया जा सकता है। प्रशासक नियुक्त होने के बाद किसी भी नए कार्य को शुरू करने से पूर्व जिलाधिकारी की स्वीकृति लेना आवश्यक होगा।
जिन ग्राम पंचायतों में पहले से प्रशासनिक समिति गठित है अथवा प्रधान का पद रिक्त है, वहां सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को प्रशासक नामित किया गया है। ऐसे सभी मामलों में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर प्रशासक अथवा चेकर का नाम नियमानुसार दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।