तरबगंज। एक कॉलेज के वार्षिकोत्सव में शनिवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल ने कहा कि प्रत्येक बच्चे में विशिष्ट मेधा होती है। उसे पहचानने और समय रहते निखारने की आवश्यकता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि थॉमस अल्वा एडिसन के शिक्षक ने उन्हें मंदबुद्धि बताकर पढ़ाने से मना कर दिया था, लेकिन मां की प्रेरणा से आगे चलकर उसी बालक ने बल्ब का आविष्कार किया।
न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल ने कहा कि हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार है। आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कर उन्हें कोटे के तहत निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे क्षेत्र का नाम रोशन कर सकें।
कार्यक्रम में सीजेएम अमित सिंह, ग्राम न्यायालय तरबगंज के न्यायिक मजिस्ट्रेट रोहित सोनी, एमएलसी अवधेश कुमार उर्फ मंजू सिंह, विधायक प्रेमनरायन पांडेय, डॉ. वीके सिंह, बसंत शुक्ल, मनोज चौबे, उमेश पांडेय आदि मौजूद रहे। संस्थापक बृजेश पांडेय ने अतिथियों को अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न भेंटकर स्वागत किया। (संवाद)