चैत्र माह का नवरात्र शुक्रवार से शुरू हो रहा है। इसे लेकर गुरुवार को दिन भर तैयारियां की गईं। कहीं मंदिरों की रंगरोगन होता रहा तो कहीं श्रद्धालु दुकानों पर पूजन व फलाहार सामग्री खरीदने में जुटे रहे।
शक्ति की उपासना भारतीय संस्कृति में रची बसी है, इसलिए वर्ष में दो बार आदि शक्ति जगत जननी जगदंबा को प्रसन्न करने के लिए नौ दिवसीय व्रत एवं पूजन की परंपरा चली आ रही है।
भारतीय नव वर्ष के शुरूआत पर चैत्र माह में नवरात्र का आयोजन होता है, जिसमें देवी के नौ रूपों की आराधना कर परिवार, रिश्तेदारों के लिए मनौतियां की जाती हैं। शुक्रवार से शुरू हो रहे नवरात्र को लेकर गुरुवार को दिन भर तैयारियां की गईं।
काली भवानी मंदिर व खैरा भवानी मंदिर परिसर की सफाई की गई। काली भवानी मंदिर के महंत ने बताया कि इस बार रंगाई पोताई कर उसे नया रंग रूप दिया गया है। खैरा भवानी मंदिर के भी परिसर व पोखरे की सफाई की गई।
पूजन विधि
पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना से नवरात्र का आरंभ होगा। इस दिन श्रद्धालुु सुबह मां के स्थान की साफ सफाई कर मूर्तियों को रखेंगे। नहलाने के बाद मां को वस्त्र (चुनरी) धारण कराएंगे। इसके बाद विधिवित नौ ग्रहों की पूजा के साथ गणपति, गौरी व अगिभनदेव की पूजा करते हुए कलश का स्थापन करेंगे। कलश स्थापना के बाद नारियल, फल व मिष्ठान को भोग लगाकर विधिवत सप्तशती का पाठ करेंगे। पूजन विधि में अधिकांश लोग अखंड ज्योति की स्थापना भी करते हैं जो नौ दिनों तक अनवरत जलता रहेगा।