गोंडा। भारतीय नववर्ष के साथ ही वासंतिक नवरात्र का प्रारंभ बुधवार से हो रहा है। इस बार नवरात्र में आराधना से पहले ही कोरोना वायरस जैसे महाअसुर के आगमन से मां के पूजा में विघ्न पड़ा है। सामाजिक सुरक्षा के नाते प्रशासन आम जनमानस को बचाने के लिए हर तरह के उपाय कर रहा है लेकिन इसका असर पूजापाठ पर भी पड़ा है। एक-दूसरे के संपर्क में आने से फैलने वाले कोरोना संक्रमण के कारण सभी मंदिरों के पुजारियों व मठाधीशों ने मंदिरों के कपाट 31 मार्च तक बंद कर दिए हैं, ताकि भीड़ न एकत्र हो और लोग स्वस्थ रह सकें।
जिले में अति प्रसिद्ध मां खैरा भवानी मंदिर, काली भवानी मंदिर, संतोषी माता मंदिर, वाराही देवी उत्तरी भवानी मंदिर सहित सभी देवी मंदिरों यहां तक शिवालयों, हनुमान गढ़ी सहित बाबा पृथ्वीनाथ मंदिर को बंद कर दिया गया है। गोंडा व आसपास के लाखों श्रद्धालु शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर तुलसीपुर भी दर्शन को जाते हैं लेकिन इस बार वहां भी मां के दर्शन नहीं हो पाएंगे।
कोरोना का कहर इस कदर है कि प्रशासन को शासन के निर्देश पर जरूरी दुकानों को छोड़कर सभी दुकानें बंद करानी पड़ीं। दूध, फल, सब्जी व दवा की दुकानों को छोड़कर बंद का आह्वान करना पड़ा। ऐसे में मां को चढ़ाने के लिए चुनरी, नारियल, धूप, दीप नैवेद्य, हवन व पूजन सामग्री आदि की दुकानें बंद रहीं। इससे लोगों को निराशा जरूर हुई लेकिन लोगों के जीवन की सुरक्षा के लिए इस बार ऐसा करना पड़ा। पंडित राजन मिश्र कहते हैं कि मां की इच्छा के बिना कुछ भी नहीं हो सकता है। ऐसे में सभी श्रद्धालुओं से विनती है कि वे घर पर ही कलश स्थापन कर मां की आराधना करें।
देवी मंदिरों के कपाट भले ही बंद हो गए हैं, लेकिन अंदर मंदिर के पुजारी मां की आराधना करते रहेंगे। मां की आरती भी होगी और मां से इस महामारी के खात्मे के लिए पुजारी प्रार्थना करेंगे।