रुपईडीह/गोंडा। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मंशा से चल रहे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत रुपईडीह ब्लॉक में बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां स्वयं सहायता समूहों के नाम पर सरकारी धन के बंदरबांट का मामला उजागर हुआ है, जिसमें अब तक छह अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
जांच में सामने आया है कि जिन महिलाओं को स्वरोजगार के लिए सशक्त किया जाना था, वही भ्रष्टाचार के जाल में फंस गईं। आरोप है कि समूह बनाकर लाखों रुपये का लेनदेन किया गया, जबकि कई महिलाओं को इसकी वास्तविक जानकारी तक नहीं थी। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उनके खातों और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर वित्तीय लेनदेन कराया गया, लेकिन उन्हें न तो पूरी जानकारी दी गई और न ही किसी प्रकार का लाभ मिला।
मामले में अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। अब तक केवल ब्लॉक मिशन मैनेजर कुलदीप तिवारी पर ही कार्रवाई हुई है, जबकि अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे विभागीय अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते हैं। वहीं, उपायुक्त स्वत: रोजगार जेएन राव ने कहा कि मामले में साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है। यदि किसी अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सरकारी धन की रिकवरी भी कराई जाएगी।