प्रदेश सरकार जन-जन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए सरकार तमाम जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाएं संचालित कर रही है। इसलिए सभी विभागीय अधिकारी सरकार द्वारा प्रदत्त स्वास्थ्य सुविधाएं सभी लोगों तक पहुंचाएं तथा फर्जी आंकड़ेबाजी के बजाय धरातल पर कार्य करें।
यह निर्देश जिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय ने मंगलवार को जिला अस्पताल में सेव द चिल्ड्रेन स्कीम की समीक्षा करने के दौरान दिए।
डीएम ने स्वास्थ्य सेवाओं में जनपद की स्टेट रैंकिंग में सुधार लाने व लापरवाही न बरतने की नसीहत देते हुए कहा कि सभी अधिकारी संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी कराएं तथा नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को और कम करने के लिए बेहतर कार्य करें।
समीक्षा के दौरान ज्ञात हुआ कि विगत एक वर्ष के दौरान नवजात शिशु मृत्युदर कम करने के लिए सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से एस्पेक्सिया बीमारी के शिकार 1252 नवजात शिशुओं में से 1026 बच्चों का जीवन बचाया जा सका।
सेव द चिल्ड्रेन स्कीम के तहत जनपद में 299 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है, जो विभिन्न सीएचसी-पीएचसी पर जन्म लेने लेने वाले शिशुओं को मृत्यु का शिकार होने से बचाने का कार्य कर रहे हैं।
सेव द चिल्ड्रेन स्कीम के प्रभारी संतोष कौशल को फटकार लगाते हुए डीएम ने सिर्फ कागजों में ही नहीं, बल्कि फील्ड में जाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को संस्थागत प्रसव के लिए प्रोत्साहित करने व उन्हें बुनियादी सुविधाओं की जानकारी देने की नसीहत दी।
मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि जनपद में शिशु मृत्यु दर पूर्व में 65 प्रतिशत थी जो अब घटकर 53 प्रतिशत पहुंच गई है। बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का सर्वे कराया जाए, ताकि यह ज्ञात हो सके कि स्वास्थ्य सेवाओं की धरातल पर हकीकत क्या है।
जिलाधिकारी ने सभी प्रभारी चिकित्साधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार प्रदेश में छह करोड़ पौधों का रोपण एक ही दिन में किया जाना है। इसलिए सभी प्रभारी चिकित्साधिकारी अपने स्वास्थ्य केंद्राें, एएनएम सेंटरों पर पौधरोपण का कार्य हर हाल में करेंगे।