गोंडा। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बाबू ईश्वर शरण जिला अस्पताल में करीब 15 दिनों से चल रही दवाओं की किल्लत मंगलवार को काफी हद तक दूर हो गई। अस्पताल में पैरासिटामॉल, सेट्रीजिन, मेट्रोजिल, ग्लूकोज समेत अधिकांश आवश्यक दवाओं की खेप पहुंच गई। बुधवार से इनका वितरण शुरू हो जाने से इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्हें निजी दुकानों से महंगी दवाएं खरीदने की परेशानी से छुटकारा मिलेगा।
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी और वार्डों में भर्ती मरीजों को पिछले कई दिनों से चिकित्सकों द्वारा लिखी गई सभी दवाएं नहीं मिल पा रही थी। मंगलवार सुबह दवा काउंटर पर भीड़ लगी रही, लेकिन अधिकांश मरीजों को केवल एक-दो दवाएं ही मिल सकीं। इटियाथोक के नरौरा भर्रापुर निवासी रामकुमार चर्म रोग की दवा लेने पहुंचे थे। उन्हें लिखी गई चार दवाओं में से केवल एक ट्यूब और एक दवा ही मिल सकी जबकि दो दवाएं बाहर से खरीदना पड़ी।
परसपुर के पुरैना निवासी पवन ने बताया कि हाथ में चोट लगने पर डॉक्टर ने छह दवाएं लिखी थीं, लेकिन सिर्फ एक दवा ही मिली। सीएमएस डॉ. अनिल तिवारी ने बताया कि मंगलवार दोपहर तक अधिकांश आवश्यक दवाएं अस्पताल पहुंच गई हैं। बुधवार से मरीजों को नियमित रूप से दवाओं का वितरण होने लगेगा।
डेढ़ साल से नहीं हो सका परिवहन का इंतजाम
मेडिकल कॉलेज में दवाओं की आपूर्ति की समस्या केवल खरीद तक सीमित नहीं है। अस्पताल की दवाएं पहले करीब 15 किलोमीटर दूर काजीदेवर सीएचसी स्थित कारपोेरेशन के भंडार में पहुंचती हैं। वहां से मेडिकल कॉलेज तक लाने के लिए अस्पताल के पास एंबुलेंस और कार ही उपलब्ध हैं। विभाग करीब डेढ़ वर्ष से दवाओं के परिवहन के लिए ट्रक या डीसीएम हायर करने की योजना पर निर्णय नहीं ले सका है। अधिकारियों का कहना है कि नियमित परिवहन व्यवस्था होने पर दवाओं की कमी की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. बीना सिंह ने बताया कि इस संबंध में व्यवस्था बनाने की प्रक्रिया चल रही है।