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Gonda News: सोलर प्लांट से जगमग होगा मेडिकल कॉलेज

Mon, 20 Jan 2025 11:37 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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गोंडा। महाराजा देवीबख्श सिंह चिकित्सा महाविद्यालय के मेडिकल व एकेडमिक विंग जल्द ही सौर ऊर्जा की रोशनी से जगमग होंगे। परिसर में पांच करोड़ रुपये की लागत से मेगा सोलर प्लांट लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। सोमवार को कार्यदायी संस्था की ओर से पूजन के साथ कार्य का शुभारंभ कर दिया गया है। 1100 किलोवाट क्षमता वाले इस प्लांट से हर साल 66 लाख रुपये के बिजली बिल की बचत होने के साथ ही 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलेगी।
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मेडिकल कॉलेज की मेडिकल विंग में 300 बेड का अस्पताल, पैथोलॉजी, डॉक्टर व कर्मियों के आवास सहित कुल 14 भवनों को बिजली की आपूर्ति दी जाती है। एकेडमिक विंग में प्रशासनिक भवन, कॉलेज परिसर, हॉस्टल सहित अन्य भवनों में भी बिजली की आपूर्ति होती है। दोनों इकाइयाें में हर महीने औसतन 5,179 किलोवाट बिजली की खपत होती है। एक किलोवाट कनेक्शन का औसतन बिजली बिल 500 रुपये प्रति महीने आती है। जिसके हिसाब से वर्तमान समय में हर महीने करीब 25 लाख रुपये बिजली बिल चुकाना पड़ता है। जबकि मेडिकल कॉलेज में लगवाए जा रहे सोलर प्लांट की क्षमता 1100 किलोवाट है। सोलर पैनल के शुरू होने से प्रतिमाह 5.5 लाख रुपये बिजली बिल की बचत होगी। इस तरह मेडिकल कॉलेज को सालभर में करीब 66 लाख रुपये के बिजली बिल की बचत होगी।
क्षेत्रीय निदान केंद्र की छत पर लगेंगे पैनल
मेडिकल विंग में आपूर्ति के लिए सोमवार को क्षेत्रीय निदान केंद्र की छत पर निजी संस्था की ओर से हवन पूजन कर काम शुरू किया गया है। यहां से अस्पताल के विभिन्न वार्डों, इमरजेंसी, टीबी यूनिट, कोविड बिल्डिंग, कर्मियों के आवास सहित 14 भवनों में बिजली आपूर्ति दी जाएगी। एकेडमिक विंग में भवनों की छत पर पैनल लगाए जाएंगे। संस्था के सुपरवाइजर हवलदार सिंह ने बताया कि पैनल लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। दो महीने के भीतर आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। संस्था के सुपरवाइजर का दावा है कि सूरज की रोशनी न होने से भी छह घंटे तक इनर्वटर का बैकअप रहेगा।
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बिजली कटने से आती है समस्या
मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन 200 से अधिक गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं। जिनमें कई मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट या जीवनरक्षक मशीनों पर भर्ती होते हैं। वैसे तो अस्पताल को स्पेशल लाइन से बिजली की आपूर्ति दी जाती है, लेकिन कई बार फाल्ट के कारण इस लाइन की बिजली भी कई घंटे तक गुल रहती है। जिससे यहां भर्ती गंभीर मरीजों की सांस अटकने लगती है। हालांकि जेनरेटर चलाकर कुछ मशीनों के संचालन की व्यवस्था की जाती है। कुछ ऐसी मशीनें भी हैं, जिनका संचालन जेनरेटर से नहीं किया जा सकता। निजी संस्था का दावा है कि बिजली के बराबर ही सोलर पैनल भी काम करेंगे।
बिजली संकट से मिलेगी राहत
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने ने बताया कि शासन के निर्देश पर मेडिकल कॉलेज में सोलर प्लांट लगवाया जा रहा है। इससे बिजली के संकट से राहत मिलने के साथ बिजली बिल में भी बड़ी बचत होगी। बिजली के अभाव में रोगियों का इलाज प्रभावित होने की आशंका खत्म हो जाएगी।
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