गोंडा। मेडिकल कॉलेज में जरूरी दवाएं खत्म हो गईं हैं। परचा लेकर दवा काउंटर पर कतार में लगे मरीज खाली हाथ लौट रहे हैं। जल्द सेहतमंद होने की आस में उन्हें मजबूरी में बाजार से दवा खरीदनी पड़ रही है। दूरदराज से इलाज कराने आने वाले मरीजों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालत ऐसे हैं कि परचे पर डॉक्टर छह दवाएं लिख रहे हैं लेकिन दवा की कमी के कारण फार्मेसी से उन्हें महज दो दवाएं ही मिल रही हैं। आधे-अधूरे इलाज के कारण लोग दुआ के सहारे चल रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज की फार्मेसी में इन दिनों दर्द निवारक डाइक्लोजेल, विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स, कैल्शियम की गोलियां और कैल्शियम सिरप समेत कई जरूरी दवाएं नहीं हैं। इस वजह से मरीजों को अधूरा इलाज लेकर लौटना पड़ रहा है। मजबूरी में कुछ लोग फिर निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीद रहे हैं।
सोमवार को करनैलगंज से करीब 35 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचे द्वारिका प्रसाद दूबे ने बताया कि वह चर्म रोग से पीड़ित हैं। चिकित्सक ने पांच दवाएं लिखीं, लेकिन फार्मेसी से सिर्फ दो दवाएं ही मिलीं। बाकी दवाओं के बारे में बताया गया कि फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं और एक-दो दिन बाद आएंगी। उन्होंने कहा कि दोबारा सिर्फ दवा लेने के लिए इतनी दूर आना मुश्किल है।
मोहम्मदपुर गड़वार से करीब 40 किलोमीटर दूर से आए अनिरुद्ध कुमार मिश्रा ने बताया कि डॉक्टर ने छह दवाएं लिखीं, लेकिन काउंटर से सिर्फ दो दवाएं ही दी गईं। शेष चार दवाओं के लिए बताया गया कि वे आउट ऑफ स्टॉक हैं। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज और दवा की उम्मीद लेकर आने के बाद जब बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है तो इलाज का खर्च बढ़ जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह स्थिति और भी मुश्किल पैदा कर रही है।
इस समय सिर्फ 100 प्रकार की दवाएं
मेडिकल कॉलेज में बने दवा स्टॉक में करीब 280 प्रकार की दवाएं होनी चाहिए। यहां वर्तमान में सिर्फ 100 प्रकार की दवाएं ही उपलब्ध हैं। मेट्रोजिल, सेट्रीजिन, पैरासिटामॉल, गैस की दवाएं नहीं हैं। इन जरूरी दवाओं की कमी से लोग परेशान हैं।
एक-दो दिन में उपलब्ध हो जाएंगी दवाएं : सीएमएस
परिवहन संबंधी कारणों से कुछ दवाओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। दवाओं की खेप रास्ते में है और एक-दो दिन के भीतर सभी आवश्यक दवाएं अस्पताल में मिलने लगेंगी।
डॉ. अनिल तिवारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज