गोंडा। जिले की स्थायी लोक अदालत ने जिले में संचालित अमानक निजी अस्पतालों की जांच कर उन पर दण्डात्मक कार्रवाई किये जाने का आदेश दिया है। अदालत ने सीएमओ को निर्देश दिया है कि इण्डियन मेडिकल कौंसिल के मानकों को पूरा न करने वाले सभी निजी अस्पतालों पर दण्डात्मक कार्रवाई कर उसकी सूचना अदालत को उपलब्ध कराएं।
जिले में करीब 62 पंजीकृत निजी नर्सिंग होम व अस्पताल संचालित हैं। छोटे-छोटे घरों में यह अस्पताल रिहायसी इलाके में संचालित हैं। जिले का कोई भी निजी हॉस्पिटल इंडियन मेडिकल कौंसिल की ओर से जारी की गई गाइड लाइन को पूरा नहीं कर रहा है। सिर्फ पैसा कमाने की अंधी दौड़ में लगे ये अमानक अस्पताल लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। किसी भी अस्पताल में पर्याप्त प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी, बहोशी व रोग के मुताबिक चिकित्सक नही हैं। इसके अलावा मरीजों की सुरक्षा व सुविधा की सुविधाएं भी नही हैं। अस्पताल में सुविधा व रोग विशेषज्ञों के नाम पर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर लोगों से ठगी व शोषण किया जा रहा है।
इस मामले में धानेपुर थाना क्षेत्र के ग्राम जाजिया निवासी सुनील कुमार त्रिपाठी ने जिले में अमानक अस्पतालों के संचालन की जांच कराने व इस पर रोक लगाने की मांग करते हुए सीएमओ व डीएम से शिकायत की थी। इस मामले में कोई कार्रवाई न होने पर शिकायतकर्ता सुनील कुमार त्रिपाठी ने मामले को मय साक्ष्य के साथ जिले की स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया था। स्थायी लोक अदालत ने शिकायत को गंभीरता को देखते हुए स्वीकार कर मामले का परीक्षण किया। अदालत ने माना की समस्या गंभीर है इसकी जांच करा कर कार्रवाई किया जाना जरूरी है।
इस मामले में परीक्षण के बाद स्थायी लोक अदालत की प्रथम सदस्य रणजीत कुमार पाठक व द्वितीय सदस्य अनुराग सिंह विसेन ने अपने फैसले में मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिया है कि शहर में चल रहे सभी नर्सिंग होम व निजी अस्पतालों की जांच करायी जाए जो इंडियन मेडिकल कौंसिल के मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उसकी सूचना अदालत व डीएम गोंडा को प्रेषित की जाए। इस मामले में सीएमओ डॉ. मधु गैरोला ने बताया कि अदालत के आदेश का पालन कराया जाएगा।