1गोंडा। शहरी बिजली सुधारने के लिए पावर कॉर्पोरेशन ने 52 करोड़ का बजट खर्च कर दिया। तीन कंपनियों को शहर के जर्जर पोल, खुले व जर्जर तार को बदलने के साथ ही ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित करने का काम करना था। बिजली लाइनों को नए सिरे बिछाने के साथ ही पूरे शहर की लाइन को बंच केबल में बदलना था। इस काम के लिए तीन कंपनियों को ठेका दिया गया और 52 करोड़ रुपये खर्च हो गए। आधा अधूरा काम कराया गया। इसमें एक कंपनी को तो ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया। लेकिन उससे करीब 20 करोड़ की रिकवरी नहीं कराई गई। इसी तरह अन्य के कार्य धरातल पर नहीं उतरे।
शहरी बिजली व्यवस्था सुधारने के नाम पर पावर कॉर्पोरेशन में बड़े पैमाने पर गोलमाल हुए हैं। वर्ष 2013-14 में 20 करोड़ रुपये से बिजली सुधार की योजना बनी और एक कंपनी को कार्य मिला। योजना भी शहर में कहीं भी जर्जर तार, खंभे न हों और बिजली लोड नियंत्रित रहे। इसके लिए आधा अधूरा काम कराने के बाद बीच में कंपनी भाग खड़ी हुई।
वर्ष 2016 में कंपनी को ब्लैकलिस्टेड करके 20 करोड़ खर्च की रिकवरी का कार्य शुरू हुआ। अभी तक रिकवरी नहीं हो पाई है। इसके बाद वर्ष 2017 में आईपीडीएस योजना से शहरी क्षेत्र के लिए दो परियोजनाएं शुरू हुईं। इसमें गजियाबाद की कंपनी को 28.65 करोड़ 30 हजार रुपये का बजट मिला। कंपनी को शहर में 33 केवीए के तीन सब स्टेशन, 2 अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर, 100 केवीए के 28 व 250 केवीए के 8 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर की स्थापना के साथ ही 33 केवीए की 26.5 किमी लंबी लाइन, 11 केवीए की 26.95 किमी लंबी लाइन और 175.40 किमी लंबी लाइन को बंच केबल में परिवर्तन करना था।
इसी तरह दो करोड़ 65 लाख 60 हजार की दूसरी परियोजना का कार्य जिले की एक संस्था को मिला। इससे 155 एसटी पोल 11 मीटर, 19.432 किमी लम्बी लाइन के एसीएसआर वियलसी कंडक्टर, 592 पीसीसी पोल, 47.637 किमी एलटी एबीसी वर्क तथा 1.138 किमी लंबी लाइन का डाग कंडक्टर बदलना था। इन कार्यों से पूरे शहर की बिजली आपूर्ति में अमूलचूल परिवर्तन के साथ ही सुरक्षित लाइनों की व्यवस्था होनी थी। हकीकत तो यह है कि शहर की बिजली लाइन आज भी जस की तस हैं और लाइनें लोगों की जान की दुश्मन बनी हुई हैं। कई तार तो ऐसे है जो टूटने के कगार पर हैं तो खंभों की स्थिति भी ठीक नही है। पुरानी लाइनों के न बदले जाने से समस्या बरकरार है।
बिजली लाइनें खोल रही हैं पोल
शहर के प्रमुख स्थल गोविंदेपुर तिराहे पर एक ट्रांसफार्म रखने के लिए स्थान का निर्माण तीन बार हो चुका है। ट्रांसफार्मर रखने के लिए बनाए गए प्लिंथ के निर्माण पर तीन बार बजट खर्च हो चुका है। दो करोड़ रुपए ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित करने के लिए खर्च हो चुके हैं। इसके बाद भी अभी तक कई ट्रांसफार्मर सुरक्षा घेरे से बाहर हैं। बभनी कानूनगो में ट्रांसफार्मर की बैरीकेडिंग नहीं की गई है। शहर में अभी भी पुराने खंभों पर ही तारों से बिजली आपूर्ति हो रही है। शासन ने रेलवे लाइन खंभों को हटा कर नए गोल खंभे लगाने का आदेश दिया था। सुधार की योजना में इसके लिए 52 करोड़ का बजट था। फिर भी खंभों को नहीं हटाया गया। आज भी तारों पर लटकते तार और जर्जर खंभे हादसों को दावत दे रहे हैं। रानीपुरवा व महराजगंज मोहल्ले में सड़कों के किनारे जर्जर व पुराने खंभे हैं।
शासन से लेकर अधिकारी तक हुई शिकायतें, फिर भी सुधार नहीं
पावर कॉर्पोरेशन की परियोजनाओं में हुए गोलमाल की शिकायतें मुख्य अभियंता से लेकर मुख्यमंत्री तक से हुई है। भाकपा के जिला सचिव राजीव ने बताया कि जन सुरक्षा के लिए योजना तो बनाई लेकिन बजट में गोलमाल हुआ है। इसके लिए दो साल से शिकायत की जा रही है। जांच तक नही हो रही है। प्रशासन को अब गंभीरता से मामले की जांच करनी चाहिए। वहीं सभासद फहीम सिद्दीकी भी एक साल से शिकायतें कर रहें हैं और मांग कर रहे कि रकाबगंज, जिगरगंज, राधाकुंड आदि क्षेत्रों में जर्जर पोल का हवाला दिया। पोल बदलने के साथ ही बिना काम कराए ही बजट खर्च किए जाने की जांच की मांग की है।
सुरक्षा बजट की जांच की जा रही है। विभाग से पत्रावली मांगी गई है, आंदोलन के कारण रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। जल्द ही पूरे प्रकरण की जानकारी की जाएगी और कमी मिली तो कार्रवाई की जाएगी। -सत्येन्द्र कुमार सक्सेना, मुख्य अभियंता
बिजली की व्यवस्था सुधारने का कार्य पूरा हो गया है। एक कंपनी को ब्लैकलिस्टेड भी किया जा चुका है। कहीं कोई दिक्कत आएगी तो फिर कार्य कराए जाएंगे। -वेंकटरमन, अधिशाषी अभियंता प्रथम