गोंडा। निजीकरण के खिलाफ एकजुट बैंक कर्मियों की दो दिवसीय हड़ताल से सोमवार को जिले में संचालित सभी सरकारी बैंकों की शाखाओं पर ताला लटका रहा। काम काज न होने से हड़ताल के पहले दिन ही 250 करोड़ का कारोबार ठप रहा। इसके चलते मुख्यालय से लेकर कस्बों तक में कारोबारियों से लेकर आम आदमी तक परेशान हुआ।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर सोमवार को बैंक कर्मचारियों की हड़ताल से मुख्यालय से लेकर कस्बों तक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, आंध्रा बैंक सहित यूपी ग्रामीण बैंकों के क्षेत्रीय मुख्यालय से लेकर 228 बैंक शाखाओं पर ताले लटके रहे।
रोडवेज बस स्टॉप के समीप इंडियन बैंक की मुख्य शाखा के सामने हड़ताल कर कर्मचारियों ने सरकार की कर्मचारी विरोधी नीति के खिलाफ नारेबाजी कर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए इंडियन बैंक के जोनल सेक्रेटरी विपुल कुमार गुप्ता ने कहा कि बैंकों के निजीकरण से 10 लाख बैंक कर्मचारी व उनका परिवार प्रभावित होगा।
निजीकरण का असर देश के 90 फीसदी जनता पर भी पड़ेगा। केनरा बैंक के सिद्धार्थ त्रिपाठी ने कहा कि बैंकों में आम लोगों का जमा करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपया सरकार सीधे कॉरपोरेट घरानों को सौंपने की तैयारी कर रही है। हड़ताल में शामिल आफिसर्स एसोसिएशन, प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक आफीसर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक इंपलाइज यूनियन एवं प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण समिति ने धरना प्रदर्शन के बाद रीजनल प्रबंधक को अपनी चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन भी सौंपा।
शनिवार और रविवार को अवकाश के कारण बंद बैंकों में सप्ताह के पहले दिन सोमवार को भी हड़ताल के चलते काम काज नहीं हुआ। मंगलवार को भी बैंकों की बंदी कारोबारी, नौकरीपेशा से लेकर आम आदमी की परेशानी और बढ़ाएगी।
लगातार चार दिन रहने वाली बैंकों की बंदी से सबसे ज्यादा परेशानी व्यापारी वर्ग से जुड़े लोगों को बैंकिंग लेनदेन न हो पाने से उठानी पड़ेगी। हड़ताल का सीधा प्रभाव सरकारी कामकाज पर भी पड़ा। अधिकांश सरकारी लेनदेन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य ट्रेजरी अकाउंट से होने के कारण वित्तीय वर्ष के अंतिम माह में स्वीकृत बजट राशि अटकने से अधिकांश विभागों में परेशानी रही।
तीन दिनों से जारी बैंकों बंदी का सीधा असर जिले में संचालित विभिन्न बैंकों के एटीएम पर भी दिखा। एटीएम मशीन में नगदी जमा न हो पाने के कारण अधिकांश एटीएम सुबह से ही खाली हो गए थे। एटीएम कार्ड से नगदी की निकासी को जरूरतमंद आंबेडकर चौराहे से लेकर जयनारायन चौराहा तक एक एटीएम से दूसरे एटीएम के चक्कर काट परेशान रहे।
कैश उपलब्ध न होने के कारण अधिकांश बैंकों के एटीएम पर दिन भर ताला लटका रहा जबकि कुछ एटीएम के सामने बैंक कर्मचारियों ने एसोसिएशन का बैनर लगाकर संचाल बंद करा दिया। यहीं हाल ग्रामीण क्षेत्रों में लगे एटीएम बूथों पर भी रहा।