गोंडा। स्वास्थ्य विभाग को नए आयाम तक पहुंचाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन गोंडा में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की करतूत से सारे प्रयास बेकार साबित हो रहे हैं।
प्रत्येक पीएचसी, सीएचसी यहां तक कि प्रत्येक उपकेंद्र पर सातों दिन 24 घंटे महिलाओं की देखभाल व बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण व टीकाकरण की व्यवस्था फेल नजर आ रही है। इसका जीता जागता उदाहरण बालपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। इस अस्पताल में बीते 15 सालों में एक भी प्रसव नहीं हुआ।
बालपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के जिम्मे 50 हजार की आबादी की स्वास्थ्य देखभाल की जिम्मेदारी है। स्वास्थ्य केंद्र अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। वर्ष 2004 में बालपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना करायी गई। लेकिन 15 साल में भवन में एक भी प्रसव नहीं हुआ।
अस्पताल के प्रसव कक्ष में ताला लटक रहा है। बंद कक्ष जर्जर हो गया है, छत से पानी टपक रहा है। अस्पताल की इमरजेंसी सेवा पूर्ण रूप से बंद है। शनिवार को करीब साढ़े दस बजे स्वास्थ्य केंद्र पहुँचने पर कोरोना टीका लगवाने के लिए लोग इंतजार कर रहे थे।
फार्मासिस्ट काजी रिजवान मरीजों को दवा वितरण कर रहे थे। वार्ड ब्वाय राजदत्त सिंह मरीजों की देखभाल की कर रहे थे। जानकारी बताया गया कि डॉ. प्रेम दयाल आज रेस्ट पर हैं। उनके इंतजार में मरीज बैठे थे। 10 किलोमीटर के क्षेत्र में इकलौता स्वास्थ्य केंद्र दस किलोमीटर की परिधि में कोई स्वास्थ्य केंद्र न होने से अस्पताल पर काफी भीड़ रहती है।
यहां बालपुर, हरसिंहपुर, रेरूवा, नकहा बसंत, परवानपुर, धनुहा, छिटनापुर, खानपुर, कैथोला, भुलभुललिया, लोहसा, नकही, गोगिया, ठकुरापुर, हड़ियागाड़ा, सोनहरा सहित अन्य गांव के लोग बालपुर दवा के लिए आते है। अस्पताल में शुद्ध पीने का पानी न होने से मरीजों को काफी परेशानी होती है।