गोंडा। पुलिस एक युवक को उसके घर से पकड़ लाई। उसके बाद युवक को कोतवाली में बिठाए रखा और गलत ढंग से तमंचा और कारतूस दिखाकर उसे खिलाफ आर्म्स एक्ट में जेल भेज दिया गया। युवक के परिवार के लोगों ने मानवाधिकार आयोग में इसकी शिकायत की।
आयोग ने आईजी देवीपाटन मंडल से मामले जांच कराकर रिपोर्ट तलब की। आईजी के आदेश के बाद बहराइच पुलिस ने मामले की जांच की तो कोतवाल करनैलगंज समेत पांच पुलिसकर्मी दोषी पाए गए। आईजी ने कोतवाल करनैलगंज समेत पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के पुलिस अधीक्षक गोंडा को निर्देश दिए हैं।
आईजी देवीपाटन मंडल डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग में कोतवाली करनैलगंज क्षेत्र के रहने वाले देवेंद्र प्रताप सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी।
जिसमें आरोप था कि देवेन्द्र के भतीजे अद्रोण प्रताप सिंह उर्फ राजवीर सिंह को कोतवाली करनैलगंज पुलिस ने 12 अगस्त की रात गलत ढंग से उसके घर से उठा लिया और तमंचा व कारतूस दिखाकर उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट का केस दर्ज करके उसे अदालत में पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
देवेन्द्र प्रताप सिंह ने मामले की जांच देवीपाटन परिक्षेत्र के किसी अन्य जनपद से कराए जाने की मांग की थी। इस पर मामले की जांच सीओ कैसरगंज बहराइच कमलेश कुमार सिंह से कराई गई।
सीओ की जांच में पाया गया कि अद्रोण प्रताप सिंह को 12 अगस्त की रात में उसके घर से कोतवाली करनैलगंज पुलिस उठाकर थाने ले आई। इसके बाद कोतवाली करनैलगंज के उपनिरीक्षक कौशल किशोर भार्गव, उपनिरीक्षक बृजेश कुमार गुप्ता, हेड कांस्टेबल गिरजा शंकर, हेड कांस्टेबल राजू सिंह व कांस्टेबल सत्येंद्र कुमार ने 14 अगस्त को चचरी मार्ग पर बीबियापुर अवधूत नगर को जाने वाले तिराहे पर 12 बोर के तमंचा व जिंदा कारतूस के साथ उसकी गिरफ्तारी दिखाते हुए आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज कर उसे अदालत के समक्ष पेश किया।
जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पूरा मामला कोतवाली करनैलगंज के प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार सिंह की जानकारी व सहमति पर किया गया। आईजी ने बताया कि जांच रिपोर्ट में अद्रोण प्रताप सिंह को अनधिकृत रूप से थाने में रखने व गलत तरीके से आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज करने में कोतवाल समेत सभी पुलिसकर्मी दोषी पाए गए हैं।
आईजी ने पुलिस अधीक्षक बहराइच की जांच आख्या में दोषी पाए गए पुलिसकर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक गोंडा को निर्देश दिए हैं। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद पूरे मामले की रिपोर्ट मानवाधिकार आयोग को भेजी जाएगी।
आर्म्स एक्ट के मुकदमे में पुलिस की करतूत से फर्जी तरीके से जेल के सीखचों के पीछे पहुंचने वाले अद्रोण प्रताप सिंह उर्फ राजवीर सिंह को न्याय दिलाने के लिए मानवाधिकार आयोग तक लड़ाई लड़ने वाले अद्रोण प्रताप सिंह के चाचा देवेंद्र प्रताप सिंह का प्रयास रंग लाया है। इतनी दौड़ भाग के बाद मामले की डिप्टी एसपी स्तर के अधिकारी से जांच कराई गई। जांच में कोतवाल समेत पांचों पुलिसकर्मी दोषी भी पाए गए। मगर अब देवेन्द्र को एसपी की कार्रवाई का इंतजार है।