मंगुरा बाजार (गोंडा)। युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिए सरकार से आईटीआई कॉलेज को मंजूरी दी गयी थी। परंतु बजट न मिलने के कारण राजकीय औद्योगिक संस्थन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया। बिना भवन निर्माण पूरा हुए ही कछाएं चलाने की अनुमति दे दी गयी। यहां प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को 40 किमी की दूरी तय करना पड़ता है।
मामला तहसील करनैलगंज के विकास खंड परसपुर के ग्राम पंचायत सुसुंडा का है। यहां पर पिछली सरकार में तत्कालीन क्षेत्रीय विधायक व बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री योगेश प्रताप सिंह के प्रयास पर औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान को मंजूरी मिली थी। भवन व अन्य निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था यूपी सिडको को जिम्मेदारी दी गयी थी। निर्माण के लिए 2015 में लागत 627.15 लाख व कार्य पूर्ण होने का समय मार्च 2017 तय किया गया था।
मुख्य भवन, वर्कशॉप, बाउंड्रीवाल, पानी, टंकी आदि बनकर तैयार हो गया, लेकिन बजट के अभाव में भवन में कुछ आवश्यक कार्य नहीं हो पाये। जिसके कारण भवन विभाग को हैंडओवर नहीं हो पाया। बिना भवन हैंडओवर हुए ही सरकार ने 2017 से प्रवेश लेना शुरू कर दिया। यहां पर कंप्यूटर आपरेटर एंड प्रोग्रामिंग, फिटर, टर्नर, इलेक्ट्रिशयन, मैकेनिक, इलेक्ट्रिक मैकेनिक आदि की पढ़ाई होनी है।
इन ट्रेडों में प्रतिवर्ष 216 छात्र छात्राओं को प्रवेश दिया जा रहा है। लेकिन विद्यार्थी उक्त कॉलेज भवन में न पढ़कर राजकीय आईटीआई कॉलेज गोंडा में पढ़ रहे हैं। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान गोंडा के प्रधानाचार्य सतीश कुमार ने बताया कि 2017 से ही प्रवेश छात्र-छात्राओं का प्रवेश हो रहा है। परंतु शिक्षा ग्रहण करने के लिए छात्र-छात्राओं को जिला मुख्यालय आन पड़ता है। बताया कि बजट कम होने के कारण भवन नहीं मिल पाया है।
रिवाइज्ड बजट के लिए लिखा गया है। यूपी सिडको के मुख्य अभियंता देवीपाटन मंडल आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि बजट के लिए लिखा गया है। उम्मीद है कि मार्च तक बजट मिल जायेगा। बजट मिलते की कार्य पूर्ण करा दिया जायेगा। इरशाद अली, आलोक , जितेन्द्र ने बताया कि हम लोगों ने सोचा था गांव के बगल में ही प्रशिक्षण मिल जायेगा, परंतु यहां कक्षायें संचालित होने के कारण 20 किमी. आना-जाना पड़ता है। सायकिल से जाने पर थकान लगती है। गाड़ी से जाने पर किराया की समस्या होती है।