आईटीआई रोड स्थित आरएन पांडेय हॉस्पिटल परिसर में आयोजित कथा में मौजूद श्रोता। - संवाद
उन्होंने बताया कि जो वस्तु जितनी देर से मिलती है, उतनी देर तक टिकती है और जो जितनी जल्दी मिलती है, उतनी ही जल्दी चली जाती है। उन्होंने कहा कि गोवंश को बचाना और उसका संरक्षण करना बहुत जरूरी है। कथा अकेले सुनने आए हैं तो भी पूरे परिवार को पुण्य मिलेगा। कथा स्थल पर महादेव का स्वरूप दिखाई देता है। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं को सुविधा ऐसी दें कि जैसे बड़े बेटे की शादी हो रही है। कथा कराने से हजार बेटियों का विवाह कराने जैसा फल प्राप्त होता है।
कौशिक जी महाराज ने कहा कि जिस नारी का पति नहीं होता, भूलकर भी उसका अपमान नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से सारे पुण्य क्षीण हो जाते हैं। प्रवाचक ने कहा कि गर्भकाल में पति-पत्नी की जैसी भावना होती है, वैसी ही संतान उत्पन्न होती है। अच्छी संतान के लिए सात्विक जीवन निर्वहन करना होता है। जमीन पर सोएं। सूतक वाले घर में न जाएं। संयमित रहें। जहां वासना हैं, वहां अच्छी संतान पैदा नहीं हो सकती है। ईश्वर से जुड़कर जो संतान आएगी, वो गणेश की तरह होगी। कथा में डॉ. राजेश पांडेय, प्रतिभा पांडेय आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।