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ईश्वरानंद ने मांगी क्षमा तो चकित रह गए थे अंग्रेज अफसर

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गोंडा में मुजेहना के ईश्वर नंद कुट्टी पर स्थित मंदिर और तप स्थली। - फोटो : GONDA
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मुजेहना( गोंडा)। ब्लॉक मुख्यालय से लगभग आठ किलोमीटर उत्तर पश्चिम में स्थित ईश्वर नंद कुटी के बाबा ईश्वरानंद अंग्रेजी हुकूमत में अंग्रेजों की सेना में नौकरी करते थे। मगर श्रीराम प्रभु में ऐसे लीन थे कि ईश्वनंद कुटी स्थित वटवृक्ष के नीचे बैठकर जिस समय वह तपस्या करते थे। उसी समय में प्रभु की कृपा से वह ड्यूटी पर मौजूद रहते थे। जब ईश्वरानंद ने अंग्रेज अफसरों को सच्चाई बताई और ड्यूटी पर न पहुंचने के कारण क्षमा मांगी तो अंग्रेज अफसर चकित रह गए थे। ईश्वरनंद कुटी लाखों की आस्था का केंद्र है। यहां तपस्वी ईश्वरानंद की समाधि स्थल के पास में एक सरोवर है। जहां कार्तिक पूर्णिमा पर विशाल मेला लगता है। मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा पर यहां एक लाख लोग पवित्र सरोवर में आचमन करेंगें। इसके लिए अभी से ही पुलिस ने सुरक्षा की तैयारी की है।
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ईश्वरनंद कुुटी के महंथ चंद्रभूषण दास ने बताया कि कुटी के पास के सतनामी पुरवा निवासी ईश्वरानंद अंग्रेजी हुकूमत के दौरान अंग्रेजों की सेना में कार्यरत थे। उनकी रामायण पढ़ने में बहुत ही रुचि थी। एक दिन वह यहां स्थित वटवृक्ष के नीचे बैठकर रामायण पढ़ते-पढ़ते इतने लीन हो गए कि ड्यूटी पर जाना भूल गए। जब उन्हें ध्यान आया तो बड़ा पछतावा हुआ और उन्होंने अपने संबंधित अधिकारी से अपने अनुपस्थिति के लिए क्षमा मांगी। इस पर अंग्रेज अधिकारी चकित रह गया और बोला कि अभी तो आप ड्यूटी पूरी करके वापस गए हैं और आप कह रहे हैं कि ड्यूटी पर नहीं आ सका। इसके बाद ईश्वरानंद लौट गए और कई दिनों तक रामायण पढ़ने में लीन रहे और ड्यूटी पर नहीं पहुंचे और कोई दिव्य शक्ति उनकी ड्यूटी करती रही।
मान्यता है कि एक दिन जब उन्हें आभास हुआ कि यह सब छोड़कर उन्हें साधना करनी चाहिए। इसके बाद वह वटवृक्ष के नीचे साधना में लीन होकर तपस्या करने लगे। महंथ ने बताया कि वटवृक्ष के पास ही स्थित मंदिर में उनका समाधि स्थल है और तब से यह स्थान ईश्वरनंद कुटी के नाम से प्रख्यात हो गया और लाखों लोगों की आस्था का केंद्र बन गया। कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां विशाल मेला लगता है। यहां आसपास के लोग लाखो की संख्या में पवित्र सरोवर में स्नान व आचमन करने के साथ ही ईश्वरानंद महाराज की समाधि स्थल की पूजन अर्चन करके मनोकामना पूरी करते हैं। थानाध्यक्ष धानेपुर रतन कुमार पांडेय ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा पर ईश्वरनंद कुटी पर लगने वाले मेले में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाने की तैयारी की जा रही है।
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मंदिर से चोरी हो चुकी है, राम, लक्ष्मण व सीता की मूर्ति
लोगों की आस्था से जुड़े ईश्वरनंद कुटी स्थित मंदिर में स्थापित राम, लक्ष्मण व सीता की मूर्ति यहां से पांच बार चोरी हो चुकी है। बाद में पुलिस ने राम की मूर्ति को बरामद तो कर लिया। मगर वह पुलिस के मालखाने में जमा है। न तो मंदिर के लोगों ने मूर्ति को रिलीज कराने का प्रयास किया न ही ग्रामीणों ने। इससे मंदिर में लक्ष्मण व सीता की मूर्ति तो स्थापित है। मगर राम के बिना वह भी अधूरी है।
नहीं हो सका सरोवर का सौंदर्यीकरण
समाधि स्थल से थोड़ी दूर पर स्थित सरोवर का सौंदर्यीकरण नहीं हो सका। सरोवर से सटे घाटों पर कूड़े-कचरे और गंदगी है। तटों पर घास फूस व झाड़ियां लगी हैं। ईश्वर नंद कुटी के ग्राम विकास अधिकारी पंकज कुमार मौर्या ने बताया कि ग्राम प्रधान डेढ़ साल पहले सड़क हादसे में घायल हो गए थे। उनकी मौत भी हो गई। इसके बाद यहां कार्यवाहक ग्राम प्रधान की नियुक्ति की गई। जिससे सरोवर का सौंदर्यीकरण नहीं हो सका।
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