गोंडा। जिस जिला अस्पताल में कल तक मरीजों को बेड पर चादर तक नहीं नसीब होती थी, टूटे बेड के नीचे आवारा कुत्तों का बसेरा हुआ करता था। वहां रातोंरात अचानक सब कुछ बदल गया।
बुधवार को जिला अस्पताल में कायाकल्प टीम के निरीक्षण की आहट मिलते ही रातों रात वार्डों की तस्वीर बदल गई। पुराने टूटे बेड को हटाकर नए बेड रखवा दिए गए। मरीजों के लिए नई चादर का गट्ठर खोल दिया गया। स्ट्रेचर से लेकर व्हीलचेयर तक सब नए आ गए।
जिला अस्पताल में कायाकल्प योजना के तहत हुए कार्यों के निरीक्षण के लिए बुधवार को टीम के पहुंचने से पहले ही जिला अस्पताल में बहुत सी चीजें बदल चुकी थीं। टीम को सब कुछ दुरुस्त मिले, इसके लिए एक दिन पहले ही व्यवस्थाएं चाक चौबंद कर ली गई थी।
पूरे अस्पताल परिसर में साफ-सफाई करवाकर चूने की लाइनिंग कराई गई। वहीं वार्डों में मरीजों को नई चादर व बेड का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। नर्सों की टीम किसी अतिथि की तरह मरीजों की देखभाल कर रही थी। जिस पर तीमारदारों ने कहा कि काश हर रोज कोई न कोई टीम निरीक्षण करने आ जाया करे, जिससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती रहें।
कायाकल्प की तीन सदस्यीय टीम ने बुधवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। टीम ने अस्पताल का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान रखरखाव और साफ-सफाई के साथ ही यहां मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली। टीम ने सफाई व्यवस्था के साथ ही इमरजेंसी वार्ड, वैक्सीन कक्ष, डेंगू वार्ड, चिल्ड्रेन वार्ड, दवा कक्ष का निरीक्षण किया।
उपस्थिति रजिस्टर की जांच के साथ ही कर्मचारियों को मरीजों के साथ उचित व्यवहार के निर्देश दिए। टीम ने मरीजों से स्वास्थ्य सुविधाओं सहित अनेक बिंदुओं पर जानकारी ली। प्रमुख अधीक्षक डॉ. घनश्याम सिंह ने बताया कि टीम साफ-सफाई व रखरखाव के आधार पर अस्पतालों की ग्रेडिंग करती है।
निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि अस्पताल की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। टीम ने निरीक्षण के दौरान मरीजों व कर्मचारियों से बात कर उनकी समस्याएं जानीं। पिछली बार जिला अस्पताल को कायाकल्प आवार्ड मिल चुका है।