गोंडा। सरकारी अस्पताल में तौ लूट मची है भैया.. कल रात मा 50 रुपया दीन तब लाग दर्द कै सूई। पसका निवासी बुजुर्ग ननकू मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बाहर खड़े होकर किसी व्यक्ति को अस्पताल के भ्रष्टाचार की कहानी सुना रहे थे। ननकू ने कहा, उनके भतीजे वासुदेव की हड्डी का ऑपरेशन शनिवार को हुआ है। रात में मरीज दर्द से तड़पने लगा। स्टाफ से बोलने पर 50 रुपये की डिमांड की गई।
ननकू ने कहा, पर्चे में लिख दीजिए, हम खुद बाहर से इंजेक्शन ले आएंगे। तब स्टाफ ने कहा, आप नहीं जान पाओगे, हमें पैसे दो हम ले आएंगे। पैसे देने के बाद अस्पताल का ही दर्द निवारक इंजेक्शन लगा दिया गया। ये सिर्फ ननकू का ही दर्द नहीं बल्कि मेडिकल कॉलेज में मुफ्त उपचार की इच्छा लेकर आने वाले अन्य मरीजों को भी इससे दो-चार होना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में एक तीमारदार अपने पिता की पेशाब की थैली खाली करता दिखाई पड़ा। पूछने पर तीमारदार ने बताया कि यहां सभी तीमारदारों को खुद अपने मरीज की पेशाब की थैली खाली करनी पड़ती है। मरीज को स्ट्रेचर से लाने व बेडशीट बदलने का काम भी तीमारदारों को ही करना पड़ता है।
तीमारदार ने एडी से फोन पर की शिकायत
जिला महिला अस्पताल की इमरजेंसी में रविवार को पूर्वाह्न 11:55 बजे डॉक्टर व स्टाफ नर्स की कुर्सी खाली थी। इमरजेंसी के बाहर गर्भवती मरीजों की भीड़ थी। कोई बेंच पर तो कोई जमीन पर बैठकर डॉक्टर के आने का इंतजार कर रही थी। तेंदुआ भगत निवासी उस्मान ने बताया कि करीब 15 मिनट से उनकी पत्नी को तेज दर्द हो रहा है, लेकिन इमरजेंसी में कोई डॉक्टर या स्टाफ नहीं है। इटियाथोक के महरीपुर निवासी संदीप की पत्नी को भी प्रसव पीड़ा हो रही थी, एक आशा बहू उसे बाहर से ऑपरेशन कराने के फायदे समझा रही थी, वीडियो बनता देख आशा बहू मुंह छिपाकर चली गई। इटियाथोक की सीमा देवी, मैजापुर की लक्ष्मी देवी सहित कई मरीज डॉक्टर का इंतजार करती रहीं। एक तीमारदार ने एडी हेल्थ डॉ. जयंत कुमार को फोन कर इमरजेंसी खाली होने की जानकारी दी। इमरजेंसी में तैनात डॉ. मीनाक्षी मिश्रा ने कहा, वह मरीज को डिस्चार्ज करने गई थीं। अपर निदेशक डॉ. जयंत कुमार ने कहा कि इसकी जांच कराई जाएगी।
शिकायत मिलने पर की जाएगी कार्रवाई
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अनिल तिवारी का कहना है कि अस्पताल आने वाले सभी मरीजों व तीमारदारों से अपील है कि वह किसी भी व्यक्ति को सुविधा शुल्क न दें। यदि कोई जबरदस्ती मांग करता है तो उसकी शिकायत सीएमएस कार्यालय में दर्ज कराएं। किस स्टाफ ने पचास रुपये लिए हैं, तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।