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डॉक्टर नदारद, ‘बाहरी’ लिख रहे दवाएं

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फोटो-9 गोंडा के जिला अस्पताल में मरीज को समझाता बाहरी व्यक्ति। (संवाद) - फोटो : GONDA
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गोंडा। जिला अस्पताल में बाहर से दवाई लिखने पर सख्ती बढ़ी तो डॉक्टरों ने नया तरीका निकाल लिया। डॉक्टर अब न तो खुद बाहर की दवा लिखते, न ही किसी मरीज को अपने निजी प्रैक्टिस सेंटर पर आने को कहते हैं। इसके लिए उन्होंने ओपीडी में बाहरी लोगों को लगा रखा है। ये लोग न केवल ओपीडी में बैठकर मरीजों को बाहर का पर्चा लिखते हैं, बल्कि खुलेआम मरीजों को संबधित डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस सेंटर आने को कहते हैं। नई व्यवस्था में यदि डॉक्टर से बाहर की दवा लिखने के बारे में पूछताछ होती या छोटी पर्ची पर राइटिंग मिलाई जाती तो डॉक्टर बेदाग बच जाएंगे।
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बाबा डॉक्टर साहब नहीं हैं आवास पर जाकर दिखवा लो
दोपहर करीब 11 बजे जिला अस्पताल में चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद जमा की ओपीडी खाली रही। बाहर मरीज इंतजार कर रहे थे। ओपीडी में बैठे दो लड़के बाहर आकर एक बुजुर्ग मरीज को समझाते हुए कहते हैं कि बाबा डॉक्टर नहीं आए हैं, आवास पर जाकर दिखवा लो। लड़के आवास का पता बता बताते हुए यह समझाते हैं कि इलाज से कोई फायदा होने वाला नहीं है। मैडम से इत्मिनान से मिलकर दिखवा लो सब ठीक हो जाएगा। समझाने वाले दोनों लड़कों से पूछताछ किया गया कि क्या वह जिला अस्पताल के कर्मी हैं, तो निरुत्तर हो गए।
बाहर 735 रुपये की दवाई मिली है भैय्या
नवाबगंज से इलाज कराने आई 55 वर्षीय बड़का के हाथों में बाहरी दवाओं की छोटी पर्ची तथा दूसरे हाथ में दवाओं का थैली लिए डॉ.जितेंद्र मिश्र के ओपीडी के सामने खड़ी थी। पूछने पर कहा कि बाहर से 735 रुपये की दवाई लिखी गई थी। दवाई क्या डॉक्टर साहब ने लिखी है, इसके जवाब पर कहा नहीं बगल बैठे उस भैय्या ने दवा लिखी है। साथ में बोला है किसी को बताएंगी तो दुबारा यहां दिखाई मत पड़ना।
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अस्पताल सरकारी लेकिन इंजेक्शन बाहरी
जिला अस्पताल के महिला मेडिकल वार्ड में भर्ती परसपुर के उर्मिला देवी (45) के तीमारदार के हाथों एक महंगी एंटीबाइटिक इंजेक्शन की पर्ची थमा दी गई। बताया गया कि बाहर से लाना पड़ेगा। बाहर पता करने पर बताया कि गया कि इस तीन इंजेक्शन का कीमत 1350 रुपये है।
ये मामले महज एक बानगी हैं। जिला अस्पताल में इन दिनों ऐसे ही बाहरी लोगों का राज है। यहां पर अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक में कई ऐसे लोग घूम रहे हैं, जो न तो अस्पताल के कर्मी हैं न ही तीमारदार। कई डॉक्टरों के ओपीडी में घेरा बनाए रखते हैं। डॉक्टर के आने से पहले ही वह यहां पर आ जाते हैं। कहीं पर वह मरीजों का पर्चा एकत्र करते हैं तो कहीं पर रजिस्टर अपडेट कर रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मी ने बताया कि ओपीडी से लेकर जांच तक का अधिकांश काम बाहरी लोग संभाल रहे हैं। कई वार्डों में तो ऐसे लोग मरीजों को बाकायदा अपने को स्वास्थ्य कर्मी बता रहे हैं। बाहरी व अनाधिकृत ऐसे लोगों का खेल यहीं तक नहीं है, वह मरीजों को डॉक्टर दिखवाने से लेकर उनकी जांच व सर्जरी तक का ख्याल रख रहे हैं।
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ओपीडी में मिले बाहरी तो डॉक्टर पर होगी कार्रवाई
डॉक्टरों के ओपीडी का निरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान यदि कोई बाहरी बैठा या पर्चा लिखता पाया गया तो संबधित डॉक्टर के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एसके रावत, प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल
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