मानकों को ताक पर रख कर शहर के अलग-अलग इलाकों की संकरी गलियों में 15 नर्सिंगहोम व क्लीनिक संचालित हैं। यदि कहीं हादसा हो जाए तो यहां तक न एंबुलेंस पहुंच सकती और न ही दमकल गाड़ी को रास्ता मिल सकता है। आपात स्थिति में आग पर नियंत्रण पाने और भर्ती मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने में मुश्किल हो सकती है। इन सबके बावजूद इन निजी अस्पतालों को बिना फायर एनओसी के ही पंजीकरण कर दिया गया।
लखनऊ के होटल अग्निकांड में हुई चार मौतों के बाद भी जिला प्रशासन उदासीन हैं। जिला अस्पताल के सामने संकरी गलियों में नर्सिंग होम से लेकर पैथोलॉजी, एक्स-रे, एनआईसीयू वार्ड व निजी ओपीडी तक संचालित हैं। सैकड़ों मरीज व तीमारदारों की भीड़ रहती है, लेकिन यहां अग्निशमन यंत्र व सुरक्षा के जरूरी मानक नहीं पूूूरे हैं। यदि किसी कारण आग लग जाए तो मरीजों को बाहर निकालना मुश्किल भरा होगा। इन गलियों में दमकल विभाग की गाड़ी पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं है। नर्सिंग होमों में आपातकालीन स्थिति के लिए कोई इमरजेंसी गेट की व्यवस्था भी नहीं है।
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के सामने वाली गली में, बहराइच रोड पर गल्ला मंडी के सामने वाली गली में, अयोध्या रोड पर गलियों में दर्जन भर ऐसे नर्सिंगहोम संचालित हैं जिनमें आपात स्थिति में लोगों को बचाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं है।
जुगाड़ के सहारे बिना एनओसी हो जाता पंजीकरण
नर्सिंग होम संचालन के लिए भले क्लीनिक स्टेब्लिसमेंट एक्ट के नियमों व मानकों के तहत पंजीकरण किया जाने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन इससे उलट सीएमओ कार्यालय की ओर से मानक विहीन नर्सिंगहोम का पंजीकरण कर संचालन की अनुमति दे दी जाती है। पंजीकरण के समय मानक पूरे करने का अधिकांश दावा खोखला होता है। विभागों से एनओसी जुुगाड़ के सहारे मिल जाती है। स्वास्थ्य महकमा भी इन पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी नहीं समझते।
जिले संचालित कुल नर्सिंगहोम-75
शहर में संचालित कुल नर्सिंगहोम- 46
कुल डायग्नोसिस सेंटर- 32
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा का कहना है कि जिले में जो भी नर्सिंगहोम व पैैथोलॉजी मानक पूरे नहीं कर रहे हैं, उन पर छापामार कर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे किसी भी मेडिकल संस्थान का संचालन नहीं हो सकता जिनसे मरीजों को खतरा हो।