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डॉक्टर वीआईपी ड्यूटी पर, अस्पताल में भटकते रहे मरीज

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ोटो-12 गोंडा के जिला अस्पताल में ओपीडी के बाहर लगी मरीजों की भीड़। (संवाद) - फोटो : GONDA
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गोंडा। वीआईपी ड्यूटी के नाम पर डॉक्टर आए दिन ओपीडी से नदारद रहते हैं जिससे जिला अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ रहा है। बुधवार को सपा के एक बड़े नेता के कार्यक्रम में डॉक्टरों की वीआईपी ड्यूटी लगी तो सुबह से ही मरीजों को परामर्श तक मिलना बंद हो गया जबकि कार्यक्रम का समय दोपहर एक बजे का था।
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विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता प्रतिदिन अपने-अपने प्रत्याशियों के लिए माहौल बनाने आ रहे हैं। इस पर स्वास्थ्य विभाग से विशेषज्ञ चिकित्सकों को टीम के साथ भेजा रहा है। चिकित्सकों के जाने पर मरीजों को परेशान होना पड़ता है। बुधवार को दूरदराज से इलाज की आस में आए मरीजों को जिला अस्पताल में डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ा। जब उन्हें बताया गया कि चिकित्सक वीआइपी ड्यूटी पर गए हैं तो वे निराश होकर लौट गए। यह समस्या कई दिनों से चल रही है। इस कारण कुछ मरीजों को नर्सिंग होम में इलाज करवाना पड़ता है।
बुधवार को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की जनसभा में डॉ. वीरपाल की अगुवाई में आर्थो सर्जन डॉ. पीएन सिंह, चिकित्साधिकारी डॉ. दीपक सिंह, एलटी विशाल श्रीवास्तव, फार्मासिस्ट अजय त्रिपाठी, वार्ड ब्वॉय राजकुमार शर्मा की वीआईपी ड्यूटी लगाई गई। वहीं करनैलगंज की जनसभा में डॉ. यूसुफ किदवई की अगुवाई में सर्जन डॉ. जितेंद्र पांडेय, चिकित्साधिकारी डॉ. कमल किशोर गुप्ता, फार्मासिस्ट बीडी सोनी, एलटी प्रभाकर सिंह, वार्ड ब्वॉय पंकज सिंह की ड्यूटी लगाई गई। इससे सर्जन व फिजीशियन का ओपीडी कक्ष खाली रहा। रुपईडीह से आई मनचिंता, पड़री कृपाल से आए संतराम सहित कई लोग ओपीडी के सामने बैठे डॉक्टर का इंतजार करते दिखाई पड़े।
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तीमारदारों को खींचनी पड़ रही व्हील चेयर
जिला अस्पताल में कर्मचारियों की भरमार है लेकिन यहां तीमारदारों को ही स्ट्रेचर व ह्वील चेयर खींचना पड़ता है। इससे कभी-कभी मरीज स्ट्रेचर से गिरकर घायल हो जाते हैं। वहीं जांच के लिए क्षेत्रीय निदान केंद्र पर जाने वाले रास्ते पर करीब दो महीने से पत्थर पड़ा है। इससे उस पर स्ट्रेचर खींचना मुश्किल हो जाता है।
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वीआईपी ड्यूटी पर दो टीमों को भेजा गया, वहीं ओपीडी व अन्य जांचों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है ताकि मरीजों को परेशानी न हो सके।
डॉ. एसके रावत, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल
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