गोंडा। जिला महिला अस्पताल में इलाज न मिल पाने के कारण गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद बुधवार को मूक बधिर महिला ने भी एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बीती 30 मार्च को मूक बाघिर एक महिला को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों ने गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद इलाज में लापरवाही बरतने व समय से इलाज न मिलने का आरोप लगाते हुए हंगामा काटा था। इस दौरान अस्पताल से प्रसव के तुरंत बाद महिला को डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया था। इसी कारण महिला की हालत फिर बिगड़ पर परिजनों ने एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया जहां बुधवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। प्रसूता के मौत की सूचना उसके परिजन विजय शुक्ला ने जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों को दी।
सीएम कार्यालय तक पहुंच चुका था मामला
जिला महिला अस्पताल में गुरुवार को प्रसव कराने आई मूक बधिर महिला के परिजनों ने आरोप लगाया था कि गर्भवती पूजा मिश्रा को इलाज न मिल पाने तथा अस्पताल कर्मियों की लापरवाही के चलते समय से इलाज नहीं मिल पाया जिससे गर्भस्थ शिशु की मौत हो गयी। संबधित मामले को अमर उजाला में एक अप्रैल के अंक में ‘मूक बधिर को नहीं मिला इलाज, गर्भस्थ शिशु की मौत’ हेडलाइन के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। शुक्रवार को पीड़िता के परिजन विजय शुक्ला ने अमर उजाला की कटिंग के साथ मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री को ट्विट कर शिकायत दर्ज कराई। जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुषमा सिंह ने बताया था कि उनके पास मुख्यमंत्री कार्यालय से फोन कर पूरे प्रकरण की जानकारी ली गई। वहीं वरिष्ठ महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. सुवर्णा कुमार के पास भी मामले की जानकारी जुटाने के लिए सीएम कार्यालय से फोन आया था।
तुरंत डिस्चार्ज करने से बिगड़ी हालत
महिला के परिजनों से बताया कि गर्भस्थ शिशु के मौत का शिकायत करने के लिए जाने पर अस्पताल की मैट्रन रमोला जानसन ने डांटकर भगा दिया था। बाद में हंगामा बढ़ता देख पीड़ित की शिकायत सुनी गई लेकिन प्रसूता को प्रसव के तुरंत बाद डिस्चार्ज कर दिया गया जिससे उसकी हालत बिगड़ी और नतीजन उसकी मौत हो गई। जबकि प्रसव के 24 घंटे बाद अस्पताल से डिस्चार्ज किया जाना चाहिए
मूक बधिर महिला के मामले में जांच कराई जा रही है। प्रसव के बाद परिजनों ने अपनी सहमति से महिला को उसी दिन डिस्चार्ज करवा लिया था।
डॉ. सुषमा सिंह, सीएमएस