फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मूक बधिर को नहीं मिला इलाज, गर्भस्थ शिशु की मौत

विज्ञापन
फोटो-1 गोंडा के महिला अस्पताल में गर्भस्थ शिशु के मौत के बाद हंगामा कर रहे परिजनों को समझाते-बुझात? - फोटो : GONDA
विज्ञापन
गोंडा। जिला महिला अस्पताल में मूक बधिर गर्भवती को इलाज न मिल पाने से गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही और पैसे न देने पर जबरन डिस्चार्ज करने का आरोप लगाकर जमकर हंगामा काटा। परिजनों ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी व एसपी से की है। वहीं, महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है।
विज्ञापन

मोकलपुर के मुसौली निवासी मूक-बाधिर पूजा मिश्रा के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा स्टाफ नर्स को पैसे न देने के कारण दर्द से कराह रही महिला को जबरन डिस्जार्च कर दिया गया। नतीजन उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। परिजन उमाशंकर मिश्र ने बताया कि मूक बधिर गर्भवती को प्रसव पीड़ा होने पर 28 मार्च को जिला महिला अस्पताल लाया गया। ओपीडी में डॉ. सुवर्णा कुमार ने मरीज को देखने के बाद भर्ती करने के लिए कहा। डॉक्टर ने बताया कि बच्चेदानी का मुंह खुल गया है, शाम तक बच्चा पैदा हो जाएगा। लेकिन शाम को स्टाफ नर्स सुनीता आई।
आरोप है कि स्टाफ नर्स ने मरीज के परिजनों से कहा कि कुछ पैसे दे दो तो तुरंत बच्चा पैदा करा दूं, नहीं तो घर जाओ 15-20 दिन बाद सुवर्णा से ही पैदा करवा लेना। स्टाफ नर्स ने जबरन डिस्चार्ज बना दिया। अगले दिन फिर असहनीय दर्द होने पर रात में महिला अस्पताल लाया गया। सुबह चार बजे मरा बच्चा पैैदा हुआ। परिजनों ने मामले की शिकायत स्थानीय कोतवाली में किया, लेकिन उनकी तहरीर नहीं ली गई। महिला के परिजन विजय कुमार शुक्ला ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी और एसपी के ट्विटर पर किया। जिसको संज्ञान में लेकर जांच करवाने की बात कही गई।
विज्ञापन

परिजनों को मैैट्रन ने डांटकर भगाया
गर्भस्थ शिशु के मौत की शिकायत करने पहुंचे परिजनों को अस्पताल की मैट्रन रमोला जानसन ने डांटकर भगा दिया। हंगामा बढ़ता देखकर पीड़ित की शिकायत सुनी गई। परिजनों ने बताया कि बच्चे की मौत का शिकायती पत्र लेेकर सीएमएस डॉ सुषमा सिंह ने मिलने गए तो बाहर खड़ी मैट्रन रमोला जानसन ने डांटकर भगा दिया कि मैडम अभी नहीं हैं तुम लोग फर्जी आरोप लगाते हुए चले आते हो। परिजन शिशु का शव लेकर सीएमएस कार्यालय के बाहर खड़े रहे। घंटों बाद सीएमएस के आने पर शिकायती पत्र दिया।
अस्पताल में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई है। बच्चे के गले में नाल फंस गया था ऐसी स्थित में गर्भस्थ शिशु की मौत हुई है। 28 मार्च को गर्भवती को भर्ती कराया गया था, लेकिन प्रसव में समय होने के कारण डिस्चार्ज कर दिया गया था। शिकायत मिली है जांच करवाई जा रही है।
विज्ञापन

- डॉ. सुषमा सिंह, सीएमएस महिला अस्पताल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें