खरगूपुर (गोंडा)। ग्राम रोजगार सेवकों का 18 माह से बाकी मानदेय जन्माष्टमी के अवसर पर लगभग 20 कर्मचारियों को केवल 35 रुपये से लेकर 805 रुपये तक ही मानदेय दिया गया। जबकि शासन ने 2016 में 6000 प्रतिमाह मानदेय देने का आदेश जारी किया था।
शासनादेश का उल्लंघन करते हुए अधिकारियों व कर्मचारियों ने शासनादेश को ठेंगा दिखा दिया। मामला विकासखंड रुपईडीह का है। यहां 89 ग्राम पंचायतों में से केवल 79 में ही ग्राम रोजगार सेवक मनरेगा के अंतर्गत कार्यरत हैं। आदर्श ग्राम रोजगार सेवक संघ के उपाध्यक्ष विश्वनाथ शुक्ल ने अधिकारियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुये बताया कि ग्राम रोजगार सेवकों को 18 माह से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया। जबकि शासनादेश का संज्ञान लेते हुए एक नवम्बर 2016 को 3630 रुपये प्रतिमाह मानदेय को पुनरीक्षित करते हुए विशेष सचिव हीरालाल व उपसचिव उमाकांत पाठक ने आदेश दिया था कि ग्राम रोजगार सेवकों को प्रतिमाह 6000 रुपये प्रतिमाह दिया जाये। इसमें कहीं भी कंटीजेंसी की बात नहीं कही गयी है।
जन्माष्टमी के मौके पर रुपईडीह के ग्राम पंचायत वीरपुर भोज के रोजगार सेवक चित्रा देवी को 18 माह का 35, कुरसहा के प्रमुख को 70 रुपए, सहजनवां के शैलेंद्र सिंह को 105 रुपये, सेवरहा के रक्षाराम को 140, पिरवर तारा के राजेश्वर प्रसाद को 175, हिन्दू नगर बांकी के ललिता देवी को 315 रुपये सहित लगभग 20 लोगों को अधिकतम 805 रुपये ही मानदेय दिया गया। आदर्श ग्राम रोजगार संघ के अनिल मिश्र, दीपक पाण्डेय, विश्राम गोस्वामी, जीतेंद्र राय, वृजेश ओझा, वैजनाथ, रेनू यादव, प्रेम प्रकाश गुप्ता, सुरेंद्र कुमार मिश्र सहित दर्जनों ग्राम रोजगार सेवकों ने मनमानी पूर्ण रवैये को लेकर ब्लॉक मुख्यालय पर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।