गोंडा। रिहायशी इलाकों के ऊपर से गुजर रहीं 33 केवी और 11 केवी की हाईटेंशन (एचटी) व लो टेंशन (एलटी) लाइनें खतरा बढ़ा रही हैं। कई घरों की छत और बालकनी के बेहद करीब से गुजर रही इन एचटी लाइनों की चपेट में आने से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। नियमों का हवाला देकर न तो इन्हें हटाया जा रहा है और न ही सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित ही किया जा रहा है। इससे प्रभावित परिवार भय के साये में जीवन बिताने को विवश हैं।
सिविल लाइंस के रघुकुल नगर निवासी शिक्षक विजय कुमार चौहान ने बताया कि उनके घर की छत के पास से 33 केवी लाइन गुजर रही है। इसकी चपेट में आकर वर्ष 2022 में किराएदार युवक बारिश के दौरान छत पर काम करते समय करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया था। महीनों इलाज और प्लास्टिक सर्जरी के बाद उसकी जान बच सकी। इसी तरह 10 अप्रैल को जर्जर हाईटेंशन लाइन टूटकर गिरने से रंजीत तिवारी की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों ने पहले भी लाइन हटाने की मांग की थी, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हो रही।
विद्युत विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी दिव्य रंजन के अनुसार, एचटी और एलटी लाइनों के लिए घरों से सुरक्षित दूरी और ऊंचाई के स्पष्ट मानक तय हैं। पहले खाली जमीन पर खींची गई लाइनें अब आबादी बढ़ने के कारण घरों के ऊपर आ गई हैं। ऐसे में विभाग को समय-समय पर सर्वे कर जोखिम वाली लाइनों को चिह्नित कर स्थानांतरण करना चाहिए।
तार टूटने से जल रही संपत्ति, बढ़ रहा खतरा
रघुकुल नगर के पवन कुमार मिश्र के अनुसार, 16 मार्च को 33 केवी लाइन टूटकर गिर गई, जिससे छत की स्टील ग्रिल जलने के साथ ही कई घरों की वायरिंग व बिजली उपकरण फुंक गए थे। मरम्मत के नाम पर केवल तार जोड़कर आपूर्ति बहाल कर दी गई। इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
जानकीनगर के ओंकार सिंह बताते हैं कि उनके घर के आगे-पीछे दोनों ओर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। कई बार शिकायत के बावजूद विभाग केवल अस्थायी मरम्मत कर किनारा कस लेता है।
बालपुर क्षेत्र के बालपुर हजारी, खजुरी, खालेगांव और महमूदपुर जैसे गांवों में भी जर्जर तार लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। यहां भी लंबे समय से लाइन सुधार या शिफ्टिंग की मांग को अनसुना किया जा रहा है।
लाइन शिफ्टिंग के लिए विभाग के पास अलग से बजट नहीं है। उपभोक्ता स्वयं खर्च वहन करें या जनप्रतिनिधियों की निधि से कार्य कराया जा सकता है। विभागीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
राम मोहन पांडेय, अधिशासी अभियंता