गोंडा। राजस्व अभिलेखों में कूटरचना, धोखाधड़ी और जालसाजी के केस में दो साल बाद भी विवेचना पूरी न होने पर उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने विवेचना पूर्ण कराने का आदेश देते हुए पुलिस अधीक्षक से चार सप्ताह में कारण स्पष्ट करते हुए शपथ पत्र सहित रिपोर्ट मांगी है। अगली तिथि तक जवाब न दाखिल करने पर उन्हें कागजात के साथ व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
कलेक्ट्रेट स्थित राजस्व अभिलेखागार के आरआरके विक्रमा प्रसाद वर्मा ने 6 सितंबर 2022 को कोतवाली नगर में केस दर्ज कराया था। इसमें उन्होंने कहा कि 14 फरवरी 1965 को गिर्द गोंडा आधार वर्ष के खाता संख्या-432 से खातेदार बूंदी का नाम खारिज कर ग्राम आनंदनगर पेरी के रहने वाले राजकुमार पांडेय का नाम बतौर सीरदार दर्ज करने का आदेश हुआ था। बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी) और मुख्य राजस्व अधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी की जांच में 14 फरवरी 1965 को दिन रविवार होना व रजिस्टर में वाद संख्या में भिन्नता के कारण अमल-दर-आमद को फर्जी माना गया। इस मामले में दो साल से अधिक समय के बाद भी कोतवाली पुलिस विवेचना पूर्ण नहीं कर पाई। पुलिस ने घटना का पर्दाफाश नहीं किया और न ही आरोपी को पकड़ा।
पुलिस की सुस्त कार्यशैली से विवश होकर राजकुमार पांडेय ने अधिवक्ताओं के माध्यम से उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में याचिका दाखिल की। सोमवार को प्रकरण की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और ओमप्रकाश शुक्ला ने पुलिस अधीक्षक गोंडा को आदेश दिया कि चार सप्ताह के अंदर विवेचना पूरी कराकर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। एसपी को विवेचना पूर्ण करने में हुए विलंब का कारण स्पष्ट करते हुए कोर्ट में व्यक्तिगत शपथ पत्र भी दाखिल करना होगा। ऐसा न होने पर अदालत ने अगली तिथि पर एसपी को समस्त अभिलेखों के साथ व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 16 दिसंबर निर्धारित की है।