गोंडा। ठंड बढ़ने के साथ ही मेडिकल कॉलेज में हृदय रोगियों की संख्या भी बढ़ने लगी है। ओपीडी व इमरजेंसी में मिलाकर पहले जहां चार से छह मरीज प्रतिदिन आते थे, वहीं इन दिनों रोज 15-20 मरीज आ रहे हैं। जबकि मेडिकल कॉलेज में हृदयरोग विशेषज्ञ का पद चार साल से खाली पड़ा है। इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर रेफर कर दिया जाता है। जबकि सामान्य जोखिम वाले मरीजों का फिजीशियन (एमडी मेडिसिन) की देखरेख में उपचार किया जाता है।
मेडिकल कॉलेज (तत्कालीन जिला अस्पताल) में तैनात हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. जीके सिंह विगत 30 अप्रैल 2020 को सेवानिवृत्त हो गए। उसके बाद से ही अस्पताल का हृदयरोग विभाग (कमरा नंबर 25) डॉक्टर विहीन हो गया। कुछ समय बाद विभाग का रंगरोगन कर यहां डायलिसिस यूनिट बना दी गई। हृदयरोग के मरीज अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचते हैं तो उनका ब्लडप्रेशर व सामान्य जांच कर केजीएमयू रेफर कर दिया जाता है।
फिजीशियन डॉ. राकेश तिवारी ने बताया कि ठंड में रक्त का प्रसार बाधित होने लगता है। ऐसे में अगर रक्त धमनियों में जमा होने लगे तो स्थिति गंभीर हो सकती है। यदि कोई थक्का नसों के माध्यम से हृदय या फेफड़ों में पहुंच जाए तो इससे रक्त प्रवाह बाधित हो सकता है, जिससे हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक या अन्य गंभीर समस्या हो सकती है।