उच्च न्यायालय के फैसले के बाद शिक्षामित्रों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सोमवार को सभी ब्लॉक मुख्यालयों व जिला मुख्यालय पर शिक्षामित्रों ने प्रदर्शन किया और जिले भर में परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में तालाबंदी करा दी।
जिले के करीब 1400 स्कूलों में तालाबंदी कर विरोध जताया। प्रशासन व शिक्षा विभाग शिक्षामित्रों के उग्र प्रदर्शन के आगे नतमस्तक रहा। इतना ही नहीं जिले के 520 शिक्षामित्रों ने भारत के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है।
न्यायालय द्वारा शनिवार को शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक पदों पर समायोजन को निरस्त करते हुए शिक्षामित्रों को उनके मूल पदों पर वापस करने का आदेश दिया गया। इससे जिले के शिक्षामित्रों में मायूसी छा गई।
इसे लेकर सोमवार को शिक्षामित्रों ने ब्लॉक मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया। इसके बाद जहां-जहां शिक्षामित्रों की तैनाती रही, उन विद्यालयों में तालाबंदी करा दी।
अगस्त 2014 में पहले बैच के 1108 शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पदों पर समायोजन किया गया था। इसमें करीब एक हजार विद्यालय ऐसे रहे जो या तो एकल थे या बंद थे। एकल व बंद स्कूलों में इन शिक्षामित्रों का समायोजन किया गया था।
ऐसे में शिक्षामित्रों के सहारे ही ये विद्यालय संचालित हो रहे थे। समायोजन निरस्त होने पर इन शिक्षामित्रों ने सोमवार को स्कूल का ताला ही नहीं खोला और ये पूरी तरह बंद रहे। इसके अलावा बीते अगस्त में दूसरे चरण में भी 996 शिक्षामित्रों का समायोजन हो गया था।
इनमें भी अधिकांश विद्यालयों में तालाबंदी रही। जिले के परसपुर, मनकापुर, कटरा बाजार, तरबगंज सहित सभी 16 ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर शिक्षामित्रों की बैठक हुई। इसमें शिक्षामित्रों ने निर्णय किया कि विद्यालयों में कार्य का लगातार बहिष्कार किया जाएगा। ऐसे में जिले के 2243 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में से 1400 विद्यालय बंद रहे।