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गौरव अपहरण कांड में गोरखपुर विकास प्राधिकरण कर्मी गिरफ्तार

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गोंडा। एससीपीएम मेडिकल कॉलेज के बीएएमएस छात्र गौरव हालदार के अपहरण कांड में पुलिस की जांच जारी है। तीन आरोपी नोएडा में और दो दूसरे जनपदों से गिरफ्तार किए गए थे। पांच का खुलासा तो शुक्रवार को ही पुलिस ने नोएडा में कर वहां से गिरफ्तार किए गए तीन लोगों को न्यायालय भेजा था। शनिवार को दो और आरोपियों को गोंडा में एसपी ने मीडिया के सामने पेश करने के बाद न्यायालय रवाना किया। इसमें शामिल गोरखपुर विकास प्राधिकरण का एक कर्मचारी सतीश भी मिला है।
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पुलिस अधीक्षक शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि आरोपित आपस में पासवर्ड से बात करते थे। इनके पास मोबाइल व सिम भी बरामद किया गया है। बीते सोमवार को शाम चार बजे निखिल हालदार के पुत्र गौरव हालदार, जो कि एससीपीएम कालेज में बीएएमएस का छात्र था, उसके अपहरण मामले में पुलिस को एक और सफलता हाथ लगी। पुलिस महानिरीक्षक देवीपाटन रेंज डॉ. राकेश सिंह व पुलिस अधीक्षक शैलेश कुमार पांडेय ने उसी दिन मामले की जांच शुरू कर दी।
घटना का पर्दाफाश करने के लिए गोंडा पुलिस के साथ ही एसटीएफ व विभिन्न इकाईयों की टीमों को लगाया गया था। जिसमें गोंडा पुलिस व एसटीएफ के संयुक्त अभियान में शुक्रवार को पुलिस मुठभेड़ के दौरान ग्रेटर नोएडा में डॉ. अभिषेक सिंह, नीतेश व मोहित सिंह को गिरफ्तार कर गौरव हालदार को छुड़ा लिया गया था। इसी मामले में शामिल अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए स्वॉट /सर्विलांस की टीमें लगीं थीं। इसमें इनपुट मिलने पर रोहित व सतीश को जनपद संतकबीरनगर से गिरफ्तार किया गया।
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पुलिस अधीक्षक ने बताया कि रोहित सिंह ने पूछताछ में बताया कि गौरव हालदार के पिता डॉ. निखिल उसके परिचित हैं। उनसे पैसे कमाने के लिए अपने रिश्तेदार डॉ. अभिषेक सिंह से मिलकर गौरव हालदार का अपहरण किया था। अपहरण के बाद गौरव पहचान न ले इसलिए अभिषेक उसे साथ नहीं ले गया। उसने बताया कि डॉ. अभिषेक सिंह ने उसे चार हजार रुपये व नितेश ने एक सिम दिया था और कहा कि एक नया मोबाइल लेकर उससे फिरौती की मांग करना।
इसके बाद वह बस से खलीलाबाद आ गया, जहां पर रोहित के साथ गोरखपुर विकास प्राधिकरण में काम करने वाले सतीश कुमार चौरसिया निवासी सोनाडी (हैदरबाजार) थाना धनघटा जनपद संतकबीरनगर के साथ जाकर मोबाइल लिया। बताया कि सतीश ने गौरव हालदार के पिता को फोन कर 70 लाख की फिरौती मांगी थी। हम लोगों का एक पासवर्ड था जिसके माध्यम से हम लोगों की बातचीत होती थी। प्लानिंग थी कि हर बार नये मोबाइल व सिम से फिरौती मांगी जायेगी तथा उस मोबाइल व सिम को चलते हुए ट्रक में फेंक दिया जाएगा, जिससे लोकेशन एक जगह की पता न चल सके। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इन दोनो आरोपितों की गिरफ्तारी गोंडा पुलिस ने की है।
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