वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों में 6 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली सपा का जिले से सूपड़ा साफ करते हुए भाजपा ने इस विधानसभा चुनाव में सात की सातों सीटों पर जीत दर्ज की है।
हार-जीत के इस खेल में जहां मनकापुर विधानसभा से भाजपा सरकार में पूर्व मंत्री रह चुके रमापति शास्त्री ने अपने प्रतिद्वंदी बसपा के रमेश गौतम को 60 हजार मतों से हराया तो वहीं हार-जीत का सबसे कम अंतर गोडा सदर सीट का रहा। जहां से प्रतीक भूषण शरण सिंह ने 11 हजार 641 मतों के अंतर से चुनाव जीता।
शनिवार को मंडी समिति में हुई मतगणना के रुझान कुछ इस तरह आए कि भाजपा की बढ़त लगातार 25 राउंड तक बनी रही। जिसका नतीजा रहा कि मेहनौन से लेकर गोंडा तक कोई सीट भाजपा के अलावा किसी और प्रत्याशी के खाते में नहीं गई।
यहां विधानसभा मेहनौन से जहां भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे विनय कुमार द्विेदी 84304 मत पाकर जीते तो वहीं बसपा के अरशद अली खां को 47926 मतों से ही संतोष करना पड़ा।
जबकि गोंडा सदर सीट से कैसरगंज सांसद के पुत्र प्रतीक भूषण शरण सिंह को 57938 मत मिले और वह बसपा के अपने प्रतिद्वंदी मो.जलील खां से 11641 मतों से चुनाव जीते। इसी तरह करनैलगंज से भाजपा के अजय प्रताप सिंह ने 28405 मतो के अंतर से समाजवादी पार्टी के योगेश प्रताप सिंह को मात दी। जबकि कटराबाजार से भाजपा के बावन सिंह लगातार दूसरी बार चुनाव जीते। यहां से उन्होंने सपा के बैजनाथ दुबे को 30811 मतों के अंतर से हराया।
इसके अलावा तरबगंज से भाजपा के प्रेमनारायण पांडेय ने 38422 मतों के अंतर से सपा के प्रत्याशी व कैबिनेट मंत्री विनोद कुमार सिंह को पटखनी दी। जबकि गौरा से बसपा छोड़ भाजपा में आए प्रभात वर्मा ने 23362 मतों के अंतर से सपा के रामप्रताप सिंह को मात दी। लेकिन चुनाव में सबसे बड़ी जीत दर्ज करने का खिताब लगातार 9वीं बार विधायक बनने वाले पूर्व मंत्री रमापति शास्त्री के ही नाम रहा।
जिन्होंने 60161 मतों के अंतर से अपने प्रतिद्वंदी बसपा के रमेश गौतम को हराया। मतगणना के लगातार 25 राउंड तक भाजपा प्रत्याशी रमापति शास्त्री सहित सभी 6 सीटों से चुनाव लडने वाले भाजपा प्रत्याशी अपनी विरोधी पार्टियों से आगे बने रहे। यही वजह रही कि जैसे-जैसे मतगणना के परिणाम आने शुरू हुए, भाजपा छोड़ बाकी दलों के लोग व उनके अभिकर्ता गायब होने लगे।
गोडा सदर सीट से चुनाव लड़ने वाले कैसरगंज सांसद के पुत्र प्रतीक भूषण शरण सिंह 17वीं विधानसभा के लिए चुनाव लड़ने वाले सबसे कम उम्र के विधायक बने हैं। जिनकी उम्र अभी 28 साल है। हालांकि चुनावी समर में विधानसभा मेहनौन से अपनी किस्मत आजमाने उतरे सपा प्रत्याशी राहुल शुक्ल की उम्र प्रतीक से महज एक साल कम है।
लेकिन मोदी लहर के आगे मेहनौन से लगातार तीन बार विधायक रहीं नंदिता शुक्ला के पुत्र राहुल शुक्ल को इस चुनाव मे हार का सामना करना पड़ा और वह तीसरे पायदान पर खड़े नजर आए। 28 साल की उम्र में विधायक बनने वाले कैसरगंज सांसद के पुत्र प्रतीक भूषण शरण सिंह ने शुरूआती पढ़ाई लखनऊ से करने के बाद मेलबर्न चले गए और वहां से एमबीए की डिग्री हासिल की। प्रतीक भूषण शरण सिंह की दिलचस्पी अपने पिता बृजभूषण की तरह रेसलिंग में है।