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करनैलगंज विधायक का टिकट कटा, छह सीटों पर पुराने चेहरे पर लगाया दांव

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फोटो-22 गोंडा में प्रेमनारायण पांडेय। संवाद - फोटो : GONDA
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गोंडा। भाजपा प्रत्याशियों की बहु प्रतीक्षित सूची अंतत: शुक्रवार को आ ही गई। लंबे जद्दोजहद के बीच पार्टी नेतृत्व ने करनैलगंज से विधायक अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैय्या का टिकट काटकर शेष छह सीटों पर पुराने चेहरों पर ही दांव लगाया है। करनैलगंज से भाजपा ने परसपुर के ब्लॉक प्रमुख प्रियंका सिंह के पति अजय कुमार सिंह को प्रत्याशी बनाकर बड़ा संदेश दिया है। वहीं भाजपा की एक साथ सभी सात सीटों पर उम्मीदवार तय होने से प्रमुख विपक्षी दल सपा में भी हलचल बढ़ गई है।
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भाजपा की सूची जारी होने के बाद जिले में सियासी तपिश बढ़ गई है। सदर से विधायक प्रतीक भूषण सिंह, गौरा से प्रभात वर्मा, तरबगंज से प्रेम नारायण पांडेय, मनकापुर से समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री, मेहनौन से विनय द्विवेदी व कटरा बाजार से बावन सिंह को फिर टिकट देकर भाजपा ने अपना भरोसा बरकरार रखा है। वहीं, करनैलगंज से नए चेहरे के रूप में अजय कुमार सिंह को मैदान में उतारा है। भाजपा ने टिकट देने में अधिकतर पुराने नेताओं पर ही भरोसा जताया। समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री 1974 से जनसंघ से राजनीति की पारी शुरू की। डिक्सिर से पांच बार विधायक बने और कल्याण सिंह सरकार से लेकर राजनाथ सिंह की सरकार तक मंत्री रहे। इस बार भी वह समाज कल्याण मंत्री बने। कटरा बाजार से बावन सिंह भी पार्टी में काफी पुराने हैं। उन्होंने अपने पिता की विरासत को संभाला और आज तक कायम किए हैं। अब फिर टिकट पाने में सफल रहे। वहीं सदर से प्रतीक भूषण सिंह, गौरा से प्रभात वर्मा, मेहनौन से विनय द्विवेदी दूसरी बार भाजपा से चुनाव लड़ेंगे। भाजपा से प्रेम नरायन पांडेय साल 2007 में चुनाव लड़े थे, उस समय सपा के अवधेश कुमार सिंह उर्फ मंजू सिंह चुनाव हार गए थे।
साल 2012 में वह फिर भाजपा से लड़े और चुनाव जीते। अब तीसरी बार वह भाजपा से चुनाव लड़ेंगे। भाजपा की सूची जारी होने के बाद जिले में सियासी पारा बढ़ गया है। पार्टी ने छह विधायकों पर विश्वास जताकर कई दावेदारों को झटका दिया है। कटरा बाजार से प्रमुख प्रतिनिधि भवानी भीख शुक्ल व भाजपा के नेता विनोद शुक्ल टिकट मांग रहे थे। दोनो लोगों को उम्मीद थी कि टिकट में बदलाव होगा, तो उन्हें मौका मिलेेगा। इसी तरह मेहनौन से भी पूर्व जिलाध्यक्ष पीयूूष मिश्र और हियुवा के जिलाध्यक्ष शारदाकांत पांडेय टिकट मांग रहे थे। मनकापुर से छपिया के प्रमुख अनिल पासवान व प्रमोद चंचल भी जोरशोर से लगे थे। इन सभी के मंसूबों पर पानी फिर गया। नए टिकट मांगने वालों में सिर्फ परसपुर के प्रमुख प्रतिनिधि अजय सिंह ही सफल हो सके।
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विफल रहे लल्ला भैया, बेटे को नहीं मिली तरजीह
टिकट बंटवारे में विधायक अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैय्या का टिकट काट कर भाजपा ने बड़ा संदेश दिया है। बीमारी के कारण पार्टी के कार्यक्रमों से दूर रहने पर विधायक लल्ला भैय्या को झटका मिला है, वहीं वह अपने बेटे को भी टिकट दिलाने में विफल रहे। छह बार विधायक रहे कुंवर अजय प्रताप सिंह लल्ला भैया का टिकट काटकर पंचायत चुनाव से सुर्खियों में आए अजय कुमार सिंह को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी भीतर घात के मुहाने पर आ गई है। भाजपा को अब उनके अपनों से ही खतरा बनता जा रहा है। हालांकि पंचायत चुनाव में विधानसभा करनैलगंज के परसपुर ब्लॉक से ब्लाक प्रमुख का पद जीतने वाले अजय कुमार सिंह पंचायत चुनाव के बाद ही सुर्खियों में आए और उन्हें भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह का समर्थन मिलने लगा था। दूसरी तरफ करनैलगंज में छह बार विधायक रहे कुंवर अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया खुद का स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण खुद के साथ-साथ अपने बेटे कुंवर शारदेन मोहन सिंह को टिकट दिलाए जाने की पैरवी करते रहे, लेकिन पार्टी नेतृत्व का वह भरोसा नहीं जीत सके।
दो घरानों के बीच सिमटी करैनलगंज की सियासत
करनैलगंज विधानसभा सीट पर अधिकांश समय तक राजनीति दो घरानों के बीच ही सिमटी रही। जिसमें धनावा स्टेट के कुंवर अजय प्रताप सिंह लल्ला भैया व पूर्व राज्यमंत्री योगेश प्रताप सिंह का घराना शामिल रहा। अधिक समय व सबसे ज्यादा इस सीट पर हिंदू महासभा व भाजपा के प्रत्याशी ही जीतते आए हैं। जबकि यहां से कांग्रेस, सपा व बसपा के प्रत्याशी भी जीते हैं। इस विधानसभा की अहम बात यह है कि यहां पार्टी के सिंबल पर कम व्यक्तिगत तौर पर प्रत्याशियों के बीच चुनाव होता आया है। शुरुआत के वर्षों में इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशियों की जीत हुई है। 1980 और 1985 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी उमेश्वर प्रताप सिंह ने जीत दर्ज की। 1989 में निर्दलीय प्रत्याशी कुंवर अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया ने जीत दर्ज की। 1991 से पहले वह भाजपा में शामिल हो गए। फिर उन्होंने बीजेपी से 1991 में जीत दर्ज की और भाजपा का खाता खोला। 1990 में रामजन्म भूमि का मुद्दा उठने के बाद रामलाहर में 1993 और 1996 के विधानसभा चुनाव में भी वह लगातार चुनाव जीते। इस तरह वह लगातार चार विधानसभाओं में निर्वाचित हुए हैं। 2002 में बसपा से योगेश प्रताप सिंह ने जीत दर्ज की। 2007 में कांग्रेस के प्रत्याशी अजय प्रताप सिंह ने जीत दर्ज की। इस बीच करनैलगंज में उप चुनाव हुआ, जिसमें लल्ला भैया की बहन कुंवरि बृज सिंह विधायक चुनी गईं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर बसपा छोड़ सपा में आए योगेश प्रताप सिंह ने दूसरी बार जीत दर्ज की। 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी कुंवर अजय प्रताप सिंह भाजपा लहर में विजयी हुए।

फोटो-21 गोंडा में बावन सिंह। संवाद- फोटो : GONDA

फोटो-17 गोंडा में रमापति शास्त्री। संवाद- फोटो : GONDA

फोटो-18 गोंडा में प्रतीक भूषण सिंह। संवाद- फोटो : GONDA

फोटो-19 गोंडा में प्रभात वर्मा। संवाद- फोटो : GONDA

फोटो-20 गोंडा मे अजय कुमार सिंह। संवाद- फोटो : GONDA

फोटो-16 गोंडा में विनय कुमार द्विवेदी। संवाद- फोटो : GONDA

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