गोंडा। उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक में सामने आए 21.47 करोड़ रुपये के घोटाले में पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। संगठित तरीके से घोटाले को अंजाम देने के आरोप में अब आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट लगाने की तैयारी चल रही है। नगर कोतवाली में दर्ज तीन प्राथमिकी में बैंक प्रबंधकों समेत कुल 22 लोग आरोपी बनाए गए हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
कोऑपरेटिव बैंक के ऑडिट में बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा होने के बाद शाखा प्रबंधक भुवन चंद सती की तहरीर पर नगर कोतवाली में तीन बैंक प्रबंधकों समेत 16 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किया गया था। इसके बाद खाताधारक राम प्रकाश गुप्ता और शिवेंद्र दूबे ने भी अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई। विवेचना के दौरान दलालों और बाहरी लोगों की भूमिका सामने आने पर पांच और नाम बढ़ाए गए, जिससे आरोपियों में खलबली मची हुई है।
पुलिस जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच 602 लोगों को करीब 86 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया। इनमें से 259 खाते संदिग्ध पाए गए हैं। पुलिस का मानना है कि घोटाले की रकम का लेन-देन इन्हीं खातों के जरिये किया गया। फिलहाल हर खाते की बारीकी से जांच की जा रही है।
खातों की पड़ताल पूरी होने के बाद आरोपी सूची और लंबी हो सकती है। एसपी विनीत जायसवाल ने बताया कि गैंग चार्ट तैयार कराया जा रहा है। तफ्तीश पूरी होने के बाद सभी चिन्हित आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।