गोंडा। एक तरफ सिंचाई विभाग बांध को बचाने के लिए स्पर, ठोकर और मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये घाघरा में पानी की तरह बहा रहा है। घाघरा ने रविवार को एक बार फिर रौद्र रूप दिखाते हुए खतरे के निशान से 28 सेंटीमीटर ऊपर बहने लगी। इसका असर यह है कि ऐली परसौली के पास भिखारीपुर-सकरौर बांध में कटान शुरू हो गई। रविवार की शाम तक घाघरा ने एक मीटर बांध को काटकर नदी में मिला लिया। बांध के किनारे बसे केवटाही व घोड़हन पुरवा में बाढ़ का पानी घुस गया। सितंबर माह के मध्य में इस तरह से घाघरा के उफान से लोगों में दहशत पैदा हो गई है।
नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 28 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। रविवार की सुबह 8 बजे जलस्तर 24 सेंटीमीटर ऊपर था, जो बढ़कर दिन में 2 बजे तक 28 सेंटीमीटर हो गया। इसके अलावा नदी का जलस्तर बढने का सिलसिला जारी है। बांध के किनारे बसे गांव में एक बार फिर दहशत का माहौल है। करनैलगंज क्षेत्र के ग्राम नकहरा, बांसगांव, रायपुरवा, माझा रायपुर, पारा, बेहटा, परसावल आदि गांव में लोगों की धड़कनें बढ़ गई हैं। वहीं नदी और बांध के बीच बसे 3 गांवों में एक बार फिर पानी भर गया है। ग्रामीणों को बांध का सहारा लेना पड़ा है। लोगों ने बांध को सुरक्षित ठिकाना मानते हुए बांध पर डेरा डाल दिया है।
सिंचाई विभाग ने एक बार फिर बंधे को बचाने के लिए मरम्मत और पानी का वेग कम करने के लिए बनाए गए स्पर व ठोकर को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। मगर घाघरा का जलस्तर बढ़ने से माझा रायपुरए बांसगांव और नकहरा गांव में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। सकरौर-भिखारीपुर बांध में कटान शुरू हो गई है। कई जगहों पर बांध को बचाने की मुहिम में पेड़ काटकर तटबंध पर डालने के साथ ही बालू भरी बोरियों को नदी में छोड़ा जा रहा है। रविवार को घाघरा नदी के रौद्र रूप को देखते हुए सिंचाई विभाग के अधिकारी बांध पर जमे रहे। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अमरेश कुमार सिंह एवं अवर अभियंता एनके सिंह ने बताया कि सकरौर-भिखारीपुर बांध में थोड़ी सी कटान शुरू हुई थी। जिसे रोकने का प्रयास तेजी से किया जा रहा है और बांसगांव के पास नदी बांध से सटकर बह रही है।
ऐलीपरसौली में घोड़हन पुरवा के सामने शुरू हुई कटान से बांध का करीब 1 मीटर हिस्सा नदी में समा गया। ग्रामीणों के मुताबिक मसीना लगने से लांचिंग अपरन (बांध को बचाने के लिए बनाई गई सुरक्षा दीवार) नदी में समा गया जिससे बांध पर खतरा बढ़ गया है। शनिवार की देर रात अचानक शुरू हुई कटान से हड़कंप मच गया और देखते ही देखते बांध नदी में समाने लगा। उस समय ना तो कोई अधिकारी मौजूद था और ना ही मजदूर।
सूचना मिलते ही अधिकारियों को रात में ही बांध पर आने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन सुबह होने तक बचाव कार्य शुरू नहीं हो पाया था, आक्रोशित ग्रामीणों से झड़प के बाद बचाव कार्य शुरू हुआ फिलहाल विकराल रूप धारण कर चुकी घाघरा की धारा से दरकते बांध को बचा पाना मुश्किल लग रहा है उधर दूसरी तरफ स्पर नंबर 1 के पश्चिम दिशा में बांध के किनारे बना शिवपता पत्नी कुमारे व विजय पाल पुत्र केशव राम का प्रधानमंत्री आवास भी धीरे-धीरे कटान की जद में आ रहा है। विजयपाल के घर में बाढ़ का पानी घुस जाने से पूरा परिवार बांध पर गुजारे को विवश हैं। इस बावत लेखपाल अंकित कुमार ने बताया कि त्वरित सहायता के रूप में पल्ली प्रदान की गई है। तहसीलदार तरबगंज नरसिंह नारायण वर्मा ने बांध का मुआयना कर स्थिति का जायजा लिया और बाढ़ कार्य खंड के अधिकारियों को काम में तेजी लाने का निर्देश दिया।