बूंदाबांदी के बीच शुक्रवार की दोपहर गिरी बिजली से एचटी लाइन दो स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई। इससे देवीपाटन मंडल के चार जिलों की बत्ती गुल हो गई। करीब पांच घंटे बाद करीब साढ़े पांच बजे चारों जिलों की विद्युत आपूर्ति सुचारु हो सकी। इस दौरान लोगों को तमाम दिक्कतों से जूझना पड़ा। साथ ही बत्ती गुल होने से न सिर्फ रेलवे का काम प्रभावित हुआ, बल्कि 24 घंटे बिजली वाले सरकारी अस्पतालों सहित अन्य सरकारी/गैरसरकारी प्रतिष्ठानों के अतिरिक्त लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ी।
कई दिनों से उमड़-घुमड़ रहे बादलों ने शुक्रवार को अपना रौद्र रूप कुछ इस तरह से दिखाया कि आधे घंटे के बीच कड़ाके के साथ कई बार बिजली गिरी। इसकी चपेट में आने से सुल्तानपुर से सोहावल के रास्ते गोंडा आने वाली 220 केवी बिजली की लाइन दो जगहों पर इंसुलेटर व डिस्क पंचर हो जाने के कारण डैमेज हो गई। दिन में साढ़े 12:30 बजे के बीच हाईटेंशन लाइन पर गिरी बिजली से अचानक चारों जिलों की बत्ती गुल हो गई। इससे बिजली से होने वाले काम जहां के तहां ठप पड़ गए। इसका सबसे ज्यादा असर 24 घंटे बिजली वाले फीडरों में रेलवे और सरकारी अस्पतालों पर पड़ा। वहीं आम लोगों को भी इसकी दुश्वारियों से जूझना पड़ा।
पारेषण खंड विभाग के उपखंड अधिकारी आरके त्रिपाठी ने बताया कि दोपहर साढ़े 12 बजे बूंदाबांदी के बीच 220 केवी एचटी लाइन पर शुकुलगंज के नजदीक टावर संख्या 330 व 306 पर बिजली गिरने से लाइन के सारे इंसुलेटर व डिस्क पंचर हो गई है। जिन्हें पांच घंटे बाद दुरुस्त कर दिया गया और आपूर्ति बहाल कर दी गई। वहीं अधीक्षण अभियंता रविप्रकाश दुबे ने बताया कि एसडीओ आरके त्रिपाठी की मौजूदगी में उनकी दो टीमें अलग-अलग दो जगहों पर आए फाल्ट को ठीक करने में जुटी रहीं। शाम 5:45 बजे तक सभी जिलों में विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी गई है।
उधर पांच घंटे तक चार जिलों की बिजली गुल रहने से केवल मंडल के ही चार जिलों में लोगो को बिजली की किल्लत से नहीं जूझना पड़ा, बल्कि इसका असर पड़ोसी देश नेपाल में भी रहा। जहां नानपारा से बिजली की नेपाल के कुछ इलाकों को आपूर्ति की जाती है।
पड़ोसी देश नेपाल पर भी असर
देवीपाटन का मंडल मुख्यालय होने के नाते गोंडा जिले से ही बाकी तीन जिलों बहराइच, श्रावस्ती व बलरामपुर को बिजली की आपूर्ति की जाती है। इसके लिए सुल्तानपुर से सोहावल (फैजाबाद) के रास्ते 220 केवी की एक लाइन जेल रोड स्थित 220 कंट्रोलरूम लाई गई है। जहां से 132 केवी की तीन अलग-अलग लाइनों से बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती के साथ ही पड़ोसी देश नेपाल तक बिजली की आपूर्ति की जाती है। ऐसे में अगर किन्हीं कारणों से कोई खराबी सुल्तानपुर से गोंडा आने वाली लाइन में आती है तो उसकी वजह से सभी चार जिले अंधेरे में डूब जाते हैं।
10 साल से अधर में लटका बस्ती लाइन का विकल्प
गोंडा को बिजली के एक और विकल्प से जोड़े जाने का काम बीते 10 वर्षों से यहां पेंडिंग चल रहा है। बस्ती से जिस 220 केवी लाइन को गोंडा लाया जाना है, उसका काम काफी हद तक पूरा हो चुका है। लेकिन जब तक केन्द्र व राज्य सरकार की इकाइयां एनएलडीसी व एसएलडीसी से बिजली की एचटी लाइन का शटडाउन नहीं दिया जाता, तब तक बस्ती लाइन चालू नहीं होगी। ऐसे में मंडल के चार जिलों की बिजली कब गुल हो जाए, कह पाना मुश्किल है।