जलस्तर घटते ही राप्ती नदी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। कई गांव में किसानों के खेत व मकान नदी में समाहित हो रहे हैं। नदी के मुहाने पर बसे गांवों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। पीड़ितों ने शासन प्रशासन से नदी की कटान पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की है।
विदित हो कि सोमवार को चेतावनी बिंदु 103.620 मीटर के करीब पहुंचा राप्ती नदी का जलस्तर मंगलवार को घटकर 103.090 मीटर हो गया है। नदी का जलस्तर घटते ही मनियारिया, मझारी, लखमा, चंदापुर, अल्लीपुर बुजुर्ग, फत्तेपुर, बभनपुरवा, रुस्तमनगर, बिरदा बनियाभारी, गोनकोट, महुवा धनी समेत उतरौला तहसील क्षेत्र के करीब 64 गांव कटान की जद में आ गए हैं।
मटियारियाकर्मा निवासी राजमनी का बाग व खेत, रामचरन, संतराम व रूपा देवी का खेत कटकर नदी में समाहित हो रहा है। रूपा देवी ने बताया कि खेत नदी में समाहित होेने के कारण वह लोग मजदूरी कर बच्चों का पालन पोषण कर रहे हैं।
लालनगर गांव में गन्ना सहकारी समिति उतरौला के चेयरमैन अतीक खान बहादुर हाजी का खेत भी नदी की धारा में विलीन हो रहा है। इसी गांव के भागीरथी व भोले के खेत में भी नदी कटान कर रही है। पीड़ितों का आरोप है कि हर साल बाढ़ के समय अधिकारी तथा नेता गांव आकर बचाव के हर संभव उपाय करने का आश्वासन तो देते हैं लेकिन काम कोई नहीं होता है।
चंद बालू भरी बोरियां व पत्थर डालकर कागजों में ही बचाव का काम होता है। इन लोगों ने डीएम से गांवों में हो रही कटान पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की है। इस बारे में एसडीएम उतरौला आरके सिंह यादव ने बताया कि तटबंधों तथा कटान प्रभावित गांवों का निरीक्षण कर बचाव के सभी इंतजाम किये जा रहे हैं।